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कैब और एन आर सी पर सरकार करे पुनर्विचार- शिया पर्सनल लॉ बोर्ड

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लखनऊ दिनांक 8 दिसंबर 2019 ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का वार्षिक अधिवेशन आज दिनांक 8 दिसंबर 2019 सुबह 10:00 बजे साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर लखनऊ में शुरू हुआ ।
यह सम्मेलन पिछले वर्ष पूर्व अध्यक्ष ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड मरहूम मिर्जा मोहम्मद अशफाक साहब के इंतकाल की वजह से स्थगित किया गया था ।
आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के वार्षिक अधिवेशन का आग़ाज़ कुराने पाक की सूरह यासीन की तिलावत से हुआ ।
सम्मेलन को ख़िताब करते हुए आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने सम्मेलन में आए हिंदुस्तान के कोने कोने से शिया आलिमे दीन, ओलमा, जाकरीन और अवाम का खैर मक़दम किया। उन्होंने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता अमेंडमेंट बिल (कैब) में केवल मुसलमानों को छोड़कर तमाम धर्मों के लोगों को शामिल करने और एनआरसी पर चर्चा करने को कहा।
अधिवेशन को संबोधित करते हुए शिया पर्सनल ला बोर्ड के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मौलाना सायम मेहंदी ने सबसे पहले ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के फाउंडर मिर्जा मोहम्मद अतहर और मिर्जा मोहम्मद अशफाक साहब की रुह के लिए सूरह फातिहा पढ़ने की गुजारिश की । उन्होंने कहा लोग पूछते हैं ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड को बनाने की क्या आवश्यकता पड़ी, जबकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड पहले से ही काम कर रहा था।
उन्होंने बताया कि मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने शियो के साथ वैसा ही सुलूक किया जैसा जनाबे याकूब के बेटों ने जनाबे यूसुफ के साथ किया था।
उन्होंने कहा कि मैं शुक्रगुजार हूं मरहूम मिर्जा मोहम्मद अतहर साहब का जिन्होंने हिंदुस्तान में शिया समुदाय की धार्मिक एवं सामाजिक जरूरतों को देखते हुए फिक़हे जाफरया को आगे बढ़ाने के लिए ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का गठन किया। पिछले 14 वर्षों में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने कई बड़े बड़े कामों को अंजाम दिया जिसमें सबसे पहले मॉडर्न निकाहनामा, सरकारी हज कमेटी में 3 शिया नुमाइंदों को नामित कराने आदि जैसे कार्य प्रमुख हैं।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अधिवेशन में प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि एनआरसी,मॉब लिंचिंग पर और शिया, सुन्नी वक्फ बोर्ड एक साथ करने पर चर्चा कर रहे हैं।
मौलाना ने कहा कि हम एनआरसी के खिलाफ नहीं है मगर उन्होंने कहा कि एनआरसी पर सरकार पुनर्विचार करे।
मौलाना ने कहा कि हम अल्पसंख्यक के अंदर अल्पसंख्यक हैं।जितना ज़ुल्म शिया समुदाय पे हो रहा है उतना किसी पे नही हो रहा है। शियों को अफ्गानिस्तान और पकिस्तान में मारा जा रहा है। शियों क़े लिए सिर्फ कनाडा ने दरवाज़ा खोल दिया है और पनाह दे रहा है ।
जिस तरह ज़ुल्म हो रहा है क्या हिन्दुस्तान सरकार शियों क़े लिये दरवाज़ा नही खोल सकती है।
इस संबंध में प्रधानमन्त्री और भाजपा क़े राष्ट्रीय अध्यक्ष को प्रस्ताव भेजेंगे।
उन्होंने कहा कि एनआरसी से डर नही रहे है मगर सरकार पुनर्विचार कर ले तो बेहतर है । हम किसी भी सरकार क़े खिलाफ नही हैं। मगर हमारी बातें सुनी जायें।
शिया डेलीगेशन जस्टिस सच्चर से दो बार मिला मगर हमारी सुनवाई नही हुई। इसका दुख है।
जब सच्चर कमीशन की रिपोर्ट पेश की गई तो शिया समुदाय को नजरअन्दाज किया गया।
यासूब अब्बास ने मांग की कि सरकार एक कमीशन बनाए और शिया समुदाय का सर्वे कराए कि हिन्दुस्तान में हम सात करोड़ हैं या सिर्फ सात हैं। हम किसी दूसरे की रोटी नही खाना चाहते लेकिन माइनोरिटी के नाम पर जो हिस्सा मिलता है वह शिया समुदाय तक नही पहुचता है।
वक्फ बोर्ड पर उन्होंने कहा कि शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड अलग अलग रहें तो ठीक है एक होने पर शिया वक्फ को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यूपी और बिहार की तर्ज़ पर पूरे मुल्क में शिया वक्फ बोर्ड बनाने तथा हज सब्सिडि को दोबारा शुरू करने की माँग की।
प्रवक्ता ने कहा कि संविधान ने हमें रिव्यु पेटिशन का हक दिया है अगर कोई जा रहा हैं तो हमें उसपे उंगली नही उठाना चाहिए। यह उसका हक़ है। 5 एकड़ ज़मीन शिया समुदाय को नही सुन्नी वक्फ बोर्ड को मिली है तो उसके अध्यक्ष तय करें उसका वो क्या करेंगे।
देश की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा मुल्क गुलदस्ते की तरह हैं हर धर्म क़े लोग एकता क़े साथ यहाँ रहते हैं।

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