इमाम बाडा सैय्यद तक़ी साहब अकबरी गेट मे़ अष्रए मजालिस की आठवीं मजलिस को विलायत और अजादारी के उन्वान पर सम्बोधित करते हुए मौलाना सैय्यद सैफ अब्बास नक़वी ने कहा कि विलायत का मानना जरूरी है इसलिए कि विलायत ही वह ताकत है कि जब भी इस्लाम पर वक़्त पडा आगे आकर सहायता की! इतिहास इस बात का ग्वाह है कि कोइ भी समय हो वही लोग सामने आए जिनको ईष्वर द्धअल्लाह; ने अपना वली बना कर दीन की सुरक्षा के लिए भेजा था! यही वजह है कि ईष्वर द्धअल्लाह; ने पैगम्बर मोहम्मद साहब के तुरन्त बाद विलायत को रखा! ताकि बादे मोहम्मद स अ दिने इस्लाम को क़्यामत तक सुरक्षछित तरीके़ से ले जा सकें इसी लिए ईष्वर द्धअल्लाह; ने अपनी पुस्तक क़ुआर्न मे आदेष दिया है कि अए मोमिनो ईष्वर द्धअल्लाह; की पैरवी करो और उसके रसूल मोहम्मद साहब की पैरवी करो और उसके वली अमर की पैरवी करो द्धसूरा 4 अयत 59 ; और मोहम्मद साहब के वली अली अ स और उनकी औलाद हैं! अब अगर कोइ इस आदेष को नही मानता है तो वह ईष्वर के आदेष का इन्कार करता है! और ईष्वर के आदेष का इन्कार करने वाला मुसल्मान नही रह सकता!
अन्त में मौलाना सैफ अब्बास ने इमामे हुसैन के भाई जनाबे अब्बास अ स की षहादत के मसाएब बयान किए जिसको सुन कर अज़ादारो ने आसूं बहाए और गिरया एवं मातम किया और बाद मजलिस अलमे मुबारक की ज़ि़यारत कराई गइ और तबर्रूक तक़सीम कया गया!
