तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली-एनसीआर के बॉर्डर पर पिछले तकरीबन 5 महीने से किसान प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं। उनकी जिद है कि तीनों कृषि कानून पूरी तरह से वापस लिए जाएं। आलम यह है कि कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के बावजूद किसान गाजीपुर, टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर जमा हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने यूपी, हरियाणा और पंजाब के साथ-साथ राजस्थान के किसानों को भी एक बड़ी राहत प्रदान की है। इसके तहत पराली जलाकर दिल्ली-एनसीआर की हवा प्रदूषित करने वाले इन चार राज्यों के किसानों को अब जेल नहीं होगी। किसान आंदोलन के मद्देनजर इसे बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, केंद्र में सत्तासीन नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों के हितों को देखते हुए पराली जलाने पर एक करोड़ रुपये तक के मोटे जुर्माने का प्रविधान भी समाप्त कर दिया गया है। दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनरत किसानों को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का पुनर्गठन कर इस आशय की नई अधिसूचना से उक्त दोनों ही प्रविधान हटा लिए हैं। इसके अलावा आयाेग में एक सदस्य कृषि क्षेत्र से भी शामिल किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि गाजीपुर, टीकरी और यूपी गेट पर बैठे किसान क्या आंदोलन समाप्त करने और खत्म करने के बारे में विचार कर सकते हैं। स्थानीय लोगों के साथ बुद्धिजीवी वर्ग, सामाजिक संगठन भी किसान संगठनों से लगातार अपील करते आ रहे हैं कि किसान अपना आंदोलन कोरोना के मद्देनजर स्थगित कर दें।