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मौलाना यासूब अब्बास का सऊदी सरकार पर तीखा प्रहार: जन्नतुल बक़ी में रौज़ों के पुनर्निर्माण की मांग, PM से हस्तक्षेप की अपील!

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लखनऊ, 28 मार्च 2026: शहीद स्मारक लखनऊ पर आज एक विशाल विरोध प्रदर्शन ने सऊदी अरब सरकार के खिलाफ गूंज उठाई। मौलाना यासूब अब्बास के नेतृत्व में उलमा, खुतबा पढ़ने वाले, जाकरीन, मातमी अंजुमनों के सदस्य और कौमी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने जन्नतुल बक़ी कब्रिस्तान (मदीने) में रसूल-ए-इस्लाम (स.अ.व.) की इकलौती बेटी जनाबे फातिमा ज़हरा (स.अ.) और इमामों के रौज़ों को ध्वस्त करने के खिलाफ़ जोरदार एहतिजाज दर्ज किया। प्रदर्शनकारियों ने अपने घरों पर काले परचम लहराए, हाथों पर काली पट्टियां बांधीं और सऊदी हुकूमत के ख़िलाफ़ ग़म व गुस्से का खुलकर इज़्हार किया।
मौलाना यासूब अब्बास ने भाषण में सऊदी शासक आले सऊद पर 101 वर्ष पूर्व (1925 में) जन्नतुल बक़ी में मोहम्मद साहब (स.अ.व.) के खानदान और उनकी बेटी के रौज़ों को तोड़ने का इल्ज़ाम लगाया। उन्होंने कहा, “अफसोस की बात है कि सऊदी हुकूमत जिस रसूल का कलमा पढ़ती है, उनकी बेटी की क़ब्र आज भी खुले आसमान तले पड़ी है। बड़े शर्म की बात है कि शासक आलीशान महलों में रहते हैं, लेकिन रसूल की औलाद के मज़ारों पर कोई साया तक नहीं!” मौलाना ने सऊदी सरकार से मांग की कि या तो वे जन्नतुल बक़ी का पुनर्निर्माण कराएं या शिया समुदाय को इजाज़त दें कि वे ख़ुद वहां जाकर रौज़ों का निर्माण करें।
इसके साथ ही, मौलाना ने भारत के प्रधानमंत्री से अपील की कि अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सऊदी सरकार पर दबाव डालें, ताकि मदीने में ये अत्याचार रुकें और शिया समुदाय को रौज़ों की तामीर की इजाज़त मिले। उन्होंने सऊदी हुकूमत को “इस्लामी मुल्क नहीं, बल्कि आतंकवादी देश” करार दिया, जो इस्लाम का नकाब ओढ़े ग़ैर-इस्लामी काम कर रही है। मौलाना ने तंज कसा, “जो अपने रसूल की इकलौती बेटी और परिवार के रौज़ों को ध्वस्त कर दे, वो किस मुंह से मुसलमान कहलाने का दावा करता है?”
ऑल इण्डिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष स्व. मौलाना मिर्जा मोहम्मद अतहर और स्व. मौलाना मिर्जा मोहम्मद अशफ़ाक ने भी पीएम को पत्र लिखा था। अब बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष मौलाना साएम मेंहदी नक़वी ने भी प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रमुख वक्ताओं ने सऊदी हुकूमत को ललकारा
विरोध प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में मौलाना अनवर रिज़वी, मौलाना मीसम ज़ैदी, मौलाना जाफ़र अब्बास, मौलाना रज़ा अब्बास, मौलाना अली अब्बास छपरवी, मौलाना अली रिज़वान, मौलाना अली मुत्तक़ी ज़ैदी, मौलाना शरर नक़वी, मौलाना क़म्बर रिज़वी, मौलाना अब्बास रज़ा नय्यर जलालपुरी, मौलाना हसन मीरपूरी, मौलाना तफ़सीर हसन रिज़वी शामिल रहे। ऑल इंडिया शिया हुसैनी फंड के जनरल सेक्रेटरी हसन मेंहदी झब्बू, तंज़ीम ए मिल्लत के प्रिंस इक़बाल मिर्ज़ा ने भी सऊदी विरोधी नारों के बीच रौज़ों के पुनर्निर्माण की मांग दोहराई। कौमी संस्थाओं से अर्शी रज़ा, हैदरी टास्क फोर्स पदाधिकारी, तन्ज़ीमे हैदरी के शेख़ सईद, इदाराए तहाफ़्फ़ुज़ ए अज़ा के जनरल सेक्रेटरी नुसरत हुसैन (लाला), इमरान अख़्तर भोले, राजू रिज़वी, रफ़ीक़ुल रिज़वी, मेहंदी हसन बब्लू समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
भावुक समापन: मातम और नारे
समापन पर मौलाना एजाज़ अतहर ने जनाबे फातिमा (स.अ.) के मसाइब बयान किए। दस्ता ए ख़तीब उल ईमान से शुज़ा रिज़वी ने हज़रत फातिमा ज़हरा से मन्सूब नौहा पेश किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने जोरदार मातम किया। अंत में “आले सऊद मुर्दाबाद, अमरीका मुर्दाबाद, इज़राइल मुर्दाबाद” के नारों से हवा गूंज उठी। यह प्रदर्शन शिया समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग को नई जान बख्शने वाला साबित हुआ।

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