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9 ज़िल्हज यौमे शहादत सफ़ीर ए कर्बला

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हज़रत सय्यदना मुस्लिम बिन अक़ील
हज़रत सय्यदना इमाम हुसैन के चचा ज़ात भाई थे
कूफ़ा वालो के बार बार बुलाने पर मौला इमाम हुसैन ने पहले जनाब मुस्लिम को कूफ़ा भेजा ताकि वहां के माहोल की सही ख़बर मिल सके
हज़रते मुस्लिम अपने साथ अपने दोनों बेटे
1 . मोहम्मद इब्ने मुस्लिम
2 . इब्राहीम इब्ने मुस्लिम को भी कूफ़ा ले कर गए
आप 5 शव्वाल 60 हिजरी को कूफ़ा पहुंचे
कूफ़ा वालो ने बड़ी ही गर्मजोशी के साथ उनका इस्तेक़बाल किया और चंद ही घंटो में जनाब ए मुस्लिम के हाथ पर दसयों हज़ार कूफ़ियों ने मौला इमाम हुसैन की बैत कर ली
बैत होने वालो का हुजूम इस तरह उमड़ा की जैसे कोई सैलाब
जब तकरीबन 40,000 से ज़्यादा लोगो ने मौला इमाम हुसैन से वफ़ादारी का अहेद कर लिया तब जनाब ए मुस्लिम ने ख़त के ज़रिए मौला हुसैन को ये पैगाम भेजा की आप यहाँ तशरीफ़ ले आईये
जब ये ख़बर यज़ीद लानती तक पहुंची तो वो घबरा गया
उसने उस वक़्त कूफ़ा के गवर्नर नोमान इब्ने बशीर को हुक्म दिया की जनाब ए मुस्लिम को नज़रबंद कर लो और उन्हें कही पर भी ख़ुत्बा न देने दो
मगर नोमान इब्ने बशीर ने जनाब ए मुस्लिम पर किसी भी तरह की सख़्ती करने से इंकार कर दिया
तब यज़ीद ने नोमान इब्ने बशीर को बर्ख़ास्त कर के उनकी जगह एक मक्कार और ज़ालिम इंसान उबैदुल्ला इब्ने ज़्याद को कूफ़ा का गवर्नर बना कर भेजा ताकि जनाब ए मुस्लिम को रोका जाए
कूफ़ा पहुँचते ही इब्ने ज़्याद ने सबसे पहले अपने रिश्तेदारो और क़राबतदारों को इकठ्ठा किया और उन्हें लालच और इनाम के ज़रिए जनाब ए मुस्लिम की मुख़ालिफत पर राज़ी कर लिया
इसके बाद उसने
खुले आम अवाम को ये ख़ुत्बा दिया की अगर किसी ने जनाब ए मुस्लिम की हिमायत की तो उसका सर क़लम कर दिया जाएगा
इब्ने ज़याद के डर और माल ओ दौलत के लालच में ज़्यादा तर कूफ़ी अपने अहद से मुकर गए
ये ख़बर सुन कर जनाब ए मुस्लिम ने किसी घर में पनाह ली ताकि किसी तरह मौला इमाम हुसैन तक ये ख़बर भेज कर उन्हें यहाँ आने से रोका जाए
मगर वो ख़बर भेजने से पहले ही गिरफ्तार कर लिए गए
जब उन्हें इब्ने ज़्याद के पास लाया गया तब भी उनके साथ हज़ारो की तादाद में कूफ़ी शामिल थे
पर इब्ने ज़्याद की धमकी और लालच की वजह से चंद ही मिंटो में सरे कूफ़ीयो ने उनका साथ छोड़ दिया
और फिर 9 ज़िल्हज को
इब्ने ज़्याद ने कूफ़ा की एक ऊँची मीनार पर ले जा कर जनाब मुस्लिम के सर को क़लम कर दिया और ऊपर से ही आप के जिस्म ए मुबारक को नीचे फेक दिया
और कूफ़ा वालो को धमकी दी की अगर किसी ने यज़ीद की मुख़ालिफत की तो उसका भी यही हाल होगा
जनाब ए मुस्लिम की शहादत के वक़्त उनके दोने बच्चों को एक मकान में छुपा दिया गया था
अफ़सोस आख़िर उन्हें भी पकड़ कर ज़ालिमों ने शहीद कर दिया

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