नई दिल्ली, 30 अप्रैल 2026: सुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) से जुड़े एक गंभीर मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ा फटकार लगाई है। कोर्ट ने यूपी के डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया, जबकि व्यस्तता का हवाला देकर गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। संविधान के अनुच्छेद 144 का स्पष्ट हवाला देते हुए कोर्ट ने डीजीपी को सभी आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
मामला याचिकाकर्ता सतिंदर सिंह भसीन से जुड़ा है, जिन्हें इकोटेक-1 थाने के पुलिस अधीक्षक के समक्ष लुकसर जेल (बुलंदशहर) में तुरंत सरेंडर करने का आदेश जारी किया गया। यदि भसीन निर्देशों का पालन नहीं करते, तो लुकआउट सर्कुलर जारी कर सभी एयरपोर्ट्स और बॉर्डर पॉइंट्स को अलर्ट करने का स्पष्ट निर्देश है। कोर्ट ने बीएनएसएस 2023 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के प्रावधानों के तहत तत्काल कार्रवाई पर जोर दिया, जिसमें गिरफ्तारी और हिरासत की प्रक्रिया शामिल है।
कोर्ट में पेश हुए पुलिस कमिश्नर ने आदेशों को लागू करने का पूर्ण आश्वासन दिया। राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने 4 मई 2026 तक अनुपालन की गारंटी दी। जस्टिस ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, वरना contempt प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
यह फैसला पुलिस महकमे में हड़कंप मचा रहा है, खासकर नोएडा और बुलंदशहर क्षेत्र में। सतिंदर सिंह भसीन पर इकोटेक-1 थाने में दर्ज मामले की प्रकृति गंभीर बताई जा रही है, हालांकि विस्तृत आरोप अभी गोपनीय हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अनुच्छेद 144 के तहत यह आदेश पुलिस कोर्ट के प्रति जवाबदेह बनाता है।
प्रभाव: भसीन की गिरफ्तारी से जुड़े किसी भी वेडिंग या यात्रा प्लान प्रभावित हो सकते हैं। लुकआउट नोटिस से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें रुक सकती हैं। संबंधित पक्षों को सलाह दी जाती है कि 4 मई से पहले सरेंडर करें या कोर्ट में बेल याचिका दायर करें।
सुप्रीम कोर्ट का यूपी पुलिस पर शिकंजा: DGP को तलब, सतिंदर सिंह भसीन को तत्काल लुकसर जेल में सरेंडर का सख्त आदेश





