14 रमजान 15 मार्च 2025
कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैयद सादिक़ हुसैनी शिराज़ी से जारी हेल्प लाइन पर नीचे दिए गये प्रष्नो के उत्तर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी ने दिए-
नोट- महिलाओं के लिए हेल्प लाइन षुरू की गयी है जिस मे महिलाओं के प्रष्नों के उत्तर खातून आलेमा देेगीं इस लिए महिलाओं इस न0 पर संपर्क करें। न0 6386897124
षिया हेल्प लाइन में तमाम मराजए के मुकल्लदीन के दीनी मसायल जानने के लिए स्ुाबह 10 -12 बजे तक 9415580936- 9839097407 इस नम्बर पर संपर्क करें। एवं ईमेलः उंेंमस786/हउंपसण्बवउ पर संपर्क करें।
सवाल- अगर कोई रोज़ेदार जानबूझकर या भूल से एक मासूम (अ.स.) का क़ौल दूसरे मासूम (अ.स.) से जोड़कर बयान कर दे तो क्या रोज़ा टूट जाएगा?
जवाब- अगर जानबूझकर यह काम किया जाए, तो एहतियात के तौर पर रोज़ा टूट जाएगा, और अगर भूल से किया हो तो रोज़ा सही है।
सवाल- अगर मरीज़ खुद फैसला न कर सके और रोज़ा रखने या न रखने के सिलसिले में भरोसेमंद डॉक्टर की सलाह पर अमल करना उसकी शरीयत की ज़िम्मेदारी हो, तो क्या उस डॉक्टर का मोमिन या मुसलमान होना ज़रूरी है?
जवाब- डॉक्टर किसी भी मज़हब का हो, उसकी बात पर अमल करना ज़रूरी है।
सवाल- क्या कफ़्फ़ारे के साठ रोज़े लगातार रखने होंगे?
जवाब- अगर किसी व्यक्ति पर कफ़्फ़ारा वाजिब हो जाए तो इकतीस (31) रोज़े लगातार रखना ज़रूरी है, उसके बाद अंतराल कर सकता है।
सवाल- अगर रोज़े की हालत में किसी व्यक्ति की नकसीर फूट जाए और नाक या मुंह से खून निकलने लगे, तो ऐसे में रोज़े का क्या हुक्म है?
जवाब- इससे रोज़े पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और रोज़ा नहीं टूटेगा।
सवाल- क्या जब कोई व्यक्ति खुम्स या ज़कात निकाले तो उस समय नीयत करना ज़रूरी है?
जवाब- इस्लाम में हर इबादत के लिए नीयत होती है, और जब खुम्स और ज़कात निकालें तो दिल और दिमाग में होना काफी है, ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं है।




