सुप्रीम कोर्ट में 17 अप्रैल 2025 को वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हुई। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने पहले दिन करीब दो घंटे तक चली तीखी बहस सुनी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने के प्रावधान का बचाव करते हुए कहा कि यदि गैर-मुस्लिमों की उपस्थिति पर आपत्ति मानी गई, तो मौजूदा पीठ भी इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकती।
इस पर CJI संजीव खन्ना ने कड़ा जवाब देते हुए कहा, “माफ कीजिए श्री मेहता, हम सिर्फ न्यायिक फैसले की बात नहीं कर रहे। जब हम इस पीठ पर बैठते हैं, तो अपना धर्म भूल जाते हैं। हम पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष हैं। हमारे लिए दोनों पक्ष एकसमान हैं।” CJI ने यह भी पूछा कि क्या केंद्र सरकार हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की अनुमति देगी, जिसका मेहता ने स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया।
पीठ ने ‘वक्फ बाय यूजर’ के प्रावधान को खत्म करने और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने जैसे विवादास्पद प्रावधानों पर चिंता जताई। CJI ने कहा कि पुरानी मस्जिदों, जैसे जामा मस्जिद, के लिए दस्तावेज मांगना असंभव है, और ‘वक्फ बाय यूजर’ को खत्म करने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि वक्फ संपत्तियों को डिनोटिफाई करने और बोर्ड में नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगाई जा सकती है।
सॉलिसिटर जनरल ने केंद्र का पक्ष रखते हुए कहा कि कानून बनाने से पहले संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने 38 बैठकें कीं, 98.2 लाख ज्ञापनों की जांच की, और व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह कानून पारित हुआ। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है और यह संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करता है।
सुनवाई के अंत में CJI ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में कानून के विरोध में हुई हिंसा पर चिंता जताई और कहा, “जब मामला कोर्ट में है, तो हिंसा नहीं होनी चाहिए।” कोर्ट ने केंद्र को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 5 मई 2025 को निर्धारित की।
वक्फ संशोधन कानून 2025: सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, CJI खन्ना ने कहा- ‘हम धर्मनिरपेक्ष, पक्षों में कोई भेद नहीं’



