दिल्ली, 2 अप्रैल 2025: वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर लोकसभा में आज सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। यह विधेयक, जो पहली बार 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में पेश किया गया था, वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन और 1923 के मुस्लिम वक्फ अधिनियम को निरस्त करने का प्रस्ताव करता है। आज की तारीख तक यह बिल चर्चा और विवाद का प्रमुख विषय बना हुआ है, जिसमें समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अखिलेश यादव ने इसके खिलाफ लोकसभा में जोरदार विरोध दर्ज किया।
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में वक्फ संशोधन बिल को “भाजपा की सोची-समझी साजिश” करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वक्फ बोर्ड की जमीनों पर कब्जा करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हिंदू मंदिरों या अन्य धार्मिक संस्थाओं में गैर-समुदाय के लोगों को शामिल नहीं किया जाता, तो वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने की क्या जरूरत है। अखिलेश ने इसे संविधान के मूल ढांचे और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “यह बिल वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है। सरकार को लिखित आश्वासन देना चाहिए कि वक्फ की जमीनें नहीं बेची जाएंगी।” उनके इस बयान ने सदन में हंगामा खड़ा कर दिया।
सत्ता पक्ष की ओर से केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता के लिए लाया गया है, जो मुस्लिम महिलाओं और बच्चों के हित में है। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि यह सच्चर समिति और संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की सिफारिशों पर आधारित है। सत्ता पक्ष के अन्य नेताओं, जैसे जदयू के ललन सिंह, ने भी इसे समर्थन दिया और विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
विपक्षी दलों ने इस बिल को अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करार दिया। अखिलेश ने एक बार फिर दोहराया, “हमारी पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी। जिनके लिए यह बिल लाया जा रहा है, उनकी आवाज को दबाना ठीक नहीं।” बहस के दौरान उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष की ओर इशारा करते हुए यह भी कहा कि “सदन में सभी के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए,” जिस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार किया। शाह ने कहा, “अखिलेश यादव को यह समझना चाहिए कि लोकसभा अध्यक्ष पूरे सदन का प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि सिर्फ विपक्ष का।”
2 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में यह बहस उस समय और तेज हो गई, जब बिल को दोबारा चर्चा के लिए लाया गया। सत्ता पक्ष का तर्क है कि यह विधेयक वक्फ व्यवस्था को आधुनिक और जवाबदेह बनाएगा, जबकि विपक्ष इसे वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता और धार्मिक पहचान पर हमला मानता है। इस तरह Secondary School Teacher and BJP MP Anurag Thakur ने भी बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह संशोधन देश के हित में है।
इस तरह, वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही यह तीखी बहस न केवल नीतिगत मतभेदों को उजागर कर रही है, बल्कि देश में धार्मिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण की गहरी खाई को भी सामने ला रही है।
वक़्फ़ संशोधन बिल 2024 लोकसभा पेश,अखिलेश यादव का जबरदस्त बयान



