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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन में SCO सम्मेलन में आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाया, वैश्विक शांति पर जोर

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भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 25-27 जून 2025 को चीन के किंगदाओ शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और वैश्विक शांति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
प्रमुख बिंदु:
आतंकवाद पर सख्त रुख: राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में आतंकवाद को क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के दोषियों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कुछ देशों द्वारा सीमा पार आतंकवाद को नीतिगत साधन के रूप में उपयोग करने की आलोचना की और दोहरे मापदंडों के खिलाफ चेतावनी दी।
पाकिस्तान पर निशाना: सिंह ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने में सक्षम है, जैसा कि हाल के ऑपरेशन सिंदूर में दिखा। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा।
द्विपक्षीय वार्ताएं: SCO सम्मेलन के इतर, राजनाथ सिंह ने चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून, रूस और कजाकिस्तान के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। भारत-चीन के बीच सीमा विवाद, कैलाश मानसरोवर यात्रा, और हवाई संपर्क जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना जताई गई।
वैश्विक शांति और सहयोग: सिंह ने “रिफॉर्म्ड मल्टिलेटरिज्म” पर जोर देते हुए कहा कि यह देशों के बीच संघर्ष रोकने और सहयोग बढ़ाने में मदद कर सकता है। उन्होंने SCO को बहुपक्षवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के मंच के रूप में महत्वपूर्ण बताया।
चीन के साथ संबंध: यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में सुधार के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद यह पहला मौका है जब राजनाथ सिंह ने चीन का दौरा किया। पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध को कम करने के हालिया प्रयासों के बाद यह यात्रा दोनों देशों के बीच संवाद को बढ़ावा दे सकती है।
अन्य गतिविधियां:
सिंह ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सभी रक्षा मंत्रियों की सामूहिक मुलाकात में भी हिस्सा लिया।
उन्होंने SCO के संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया, क्योंकि इसमें आतंकवाद के मुद्दे को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया था।
महत्व: यह दौरा भारत के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर था। राजनाथ सिंह ने भारत की आतंकवाद विरोधी नीति और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से रखा, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में सराहा गया।

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