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रंगों पर विवाद से गरमाई सियासत, अखिलेश यादव बोले— “किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए”

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भाजपा नेता अपर्णा यादव द्वारा महिला आरक्षण बिल के बाद हुए प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडे जलाए जाने के मामले पर अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव का बयान सामने आया है। उन्होंने इस पूरे विवाद को रंगों और धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए कहा कि समाजवादियों का लाल रंग केवल क्रांति का प्रतीक नहीं है, बल्कि देवियों, हनुमान जी और नवविवाहित जोड़ों के चूड़े का भी रंग है, इसलिए किसी भी रंग या प्रतीक के जरिए किसी की भावना को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए।
अखिलेश का बयान
अखिलेश यादव ने कहा कि वे इस मुद्दे पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन रंगों का संबंध भारतीय समाज में अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से है। उनके अनुसार लाल रंग समाजवाद का प्रतीक होने के साथ-साथ आस्था, शक्ति और सम्मान का भी रंग है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में ऐसी कोई बात नहीं होनी चाहिए जिससे किसी समुदाय, वर्ग या राजनीतिक विचारधारा की भावनाएं आहत हों।
सपा की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान को सांकेतिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि झंडा जलाना केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि विचारधारा और लोकतांत्रिक मर्यादा पर हमला है। सपा का मानना है कि विरोध का तरीका मर्यादित होना चाहिए, ताकि राजनीतिक बहस की गरिमा बनी रहे।
राजनीतिक तापमान बढ़ा
इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इस प्रदर्शन को अपना विरोध दर्ज कराने का तरीका बता रही है, वहीं सपा इसे असंवेदनशील और उकसाने वाला कदम मान रही है। अखिलेश यादव के बयान के बाद यह विवाद अब केवल झंडा जलाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रंग, धर्म, परंपरा और राजनीतिक प्रतीकों की बहस में बदल गया है।

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