गुज़ारिश: मोहर्रम क़रीब है ज़रूरत है कि लखनऊ के ओलमा और ज़ाकिरीन एक टेबल पर बैठ कर बातचीत करके मुश्तरका फ़ैसला लें कि क्या करना है और क़ौम को उस फ़ैसले की इत्तेला दें कि पिछले साल की तरह कन्फयूज़न की नौबत न पैदा होने पाये कि कोई कुछ कह रहा है कोई कुछ
मौलाना कल्बे जवाद साहब से गुज़ारिश है कि बड़ा दिल दिखाते हुए मुमताज़ ओलमा , ज़ाकिरीन और दानिशमंदों की एक मीटिंग बुलाएँ सरपरस्ते क़ौम की हैसियत से और मोहर्रम व अज़ादारी के मसअले पर आपसी इख़्तिलाफात को बालाये ताक़ रख कर क़ौम और अज़ादारी के मफ़ाद में साझा फ़ैसला लिया जाये जिसका एलान ख़ुद मौलाना करें
मुझे उम्मीद है कि उनके बुलाने पर इस अहम मसअले पर सब एक टेबल पर जमा होकर इत्तेफ़ाक़ ए राय से कोई एक फ़ैसला लेंगे ताकि क़ौम के अफराद तक बिलकुल साफ़ मैसेज पहुंच जाये और तज़बज़ुब की कैफ़ियत ख़त्म हो सके ……. डा कल्बे सिब्तैन नूरी , 2 अगस्त 2021, लखनऊ*
