मिर्जा गालिब ने मीर अनीस के लिए कहा था:8
“मीर अनीस की शायरी में वो बात है, जो मेरी शायरी में नहीं है।”
गालिब ने अनीस की शायरी की बहुत प्रशंसा की थी और उन्हें एक महान शायर माना था। अनीस की शायरी में एक अनोखी शैली और गहराई थी, जो गालिब को बहुत पसंद थी।
इसके अलावा, गालिब ने अनीस के बारे में यह भी कहा था:
“अनीस की शायरी में दिल की गहराई है, जो मेरी शायरी में नहीं है।”
गालिब के ये शब्द अनीस की शायरी की महानता और उनकी अपनी शायरी से तुलना को दर्शाते हैं।
मिर्जा गालिब ने अनीस के बारे में एक प्रसिद्ध शेर लिखा है:
“रेख़्ता के उम्मीदवर हैं ग़ालिब,
कहते हैं कि अनीस की पैरवी है।”
इस शेर में ग़ालिब ने मीर अनीस की शायरी की महानता और अपनी खुद की शायरी की तुलना में उनकी पैरवी (प्रशंसा) की बात कही है। शेरों के बारे में विश्लेषण करने के बाद पता चला कि शायरी गॉड गिफ्टेड होती है इसको सीखने के बाद भी वह चीज नहीं आ सकती है जो बाई बर्थ लोगों में होती है





