मिर्ज़ा ग़ालिब का देहांत 15 फरवरी, 1869 को दिल्ली, भारत में हुआ था।
मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी के बारे में दुनिया के विशेषज्ञों का कहना है:
1. *ग़ालिब की शायरी में गहराई और संवेदनशीलता है*: ग़ालिब की शायरी में जीवन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है।
2. *ग़ालिब की शायरी में प्रेम, विरह और दर्शन का संगम है*: ग़ालिब की शायरी में प्रेम, विरह और दर्शन के विषयों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है, जो उनकी शायरी को अद्वितीय बनाता है।
3. *ग़ालिब की शायरी में उर्दू भाषा की सुंदरता और शक्ति का प्रदर्शन है*: ग़ालिब की शायरी में उर्दू भाषा की सुंदरता और शक्ति का प्रदर्शन है, जो उर्दू साहित्य के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है।
4. *ग़ालिब की शायरी में जीवन के सत्यों को उजागर किया गया है*: ग़ालिब की शायरी में जीवन के सत्यों को उजागर किया गया है, जो पाठकों को जीवन के बारे में सोचने और समझने के लिए प्रेरित करता है।
इन विशेषज्ञों की राय से यह स्पष्ट होता है कि मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी एक अद्वितीय और महत्वपूर्ण योगदान है, जो उर्दू साहित्य और जीवन के बारे में हमारी समझ को समृद्ध बनाता है।




