यूपी में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म हो गई है। योगी सरकार ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण का प्रस्ताव तीन महीने के लिए वापस ले लिया है।
इससे पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण को लेकर हुए बिजली कर्मचारियों-अधिकारियों के कार्य बहिष्कार के चलते मंगलवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में हाहाकार मचा रहा। मुख्य रूप से गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आसपास के दर्जनों जिलों में कार्य बहिष्कार का सबसे ज्यादा बुरा असर रहा। जिलों में बिजली सप्लाई पूरी तरह ठप रही। साथ ही पेयजल भी लोगों को उपलब्ध नहीं हो सका। नर्सिंग होम और छोटे अस्पतालों में बिजली गुल होने के कारण मरीजों को भी खासी दिक्कतें पेश आईं। हालांकि कई जिलों में प्रशासन ने संविदा कर्मियों और अप्रेंटिस के जरिये बिजली व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की लेकिन हालात ज्यादा देर तक काबू में नहीं रह सके।
वाराणसी में बिजली कटौती से लोग पानी को तरसे
वाराणसी समेत पूर्वांचल के 10 जिलों में मंगलवार को भी बिजली कर्मचारियों की हड़ताल की मार उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ी। पूर्वांचल के कई जिलों में 30 घंटे से बिजली आपूर्ति बाधित है। इसका सीधा असर वाराणसी, गाजीपुर, भदोही, सोनभद्र, मिर्जापुर, आजमगढ़, जौनपुर, मऊ, बलिया और चंदौली जिलों में पेयजल आपूर्ति पर पड़ा है। घरों में आवश्यक इलेक्ट्रानिक वस्तुएं भी ठप हो गईं है। कई जिलों में टैंकर से पानी लेने के लिए भी लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।