दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार योजना ‘मनरेगा’ आज ही के दिन 2005 में लॉन्च हुई थी। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस गठबंधन की सरकार ने इस योजना के जरिये आम लोगों, बेरोजगारों, गरीबों और वंचितों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी थी। इस योजना के पीछे सोच थी कि जनता को रोजगार का अधिकार मिले, देश में असमानता कम हो, जिन गरीबों के पास तंगी है उन्हें भी मदद मिले, देश का सारा धन चंद लोगों के हाथ में एकत्र न हो और ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग गरीबी से बाहर आएं।
यह योजना अपने मकसद में बेहद कामयाब रही। मात्र दस साल में देश में 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आये। यह ऐतिहासिक उपलब्धि थी। मनरेगा के तहत देश में लाखों किलोमीटर सड़कें बनीं, लाखों कुएं बने, करोड़ों हेक्टेयर खेती की जमीन का उपचार हुआ, लाखों एकड़ जमीन पर वृक्षारोपण हुआ। यह योजना लॉन्च होने के बाद से लेकर 2020 इसके तहत ग्रामीण भारत में लगभग पांच करोड़ संरचनाओं का निर्माण हुआ। मनरेगा के बिना यह काम कई दशकों में पूरा होता। विश्व बैंक जैसी संस्थाएं इसकी तारीफ़ कर चुकी हैं।
यह मनमोहन सिंह जी की दूरदर्शिता का परिणाम है कि आज देश में 15.09 करोड़ परिवारों के पास मनरेगा जॉब कार्ड है जिन्हें इसके जरिये रोजगार मिल रहा है। जब कोरोना आया तो मनरेगा ने हमारी ग्रामीण जनता की सबसे ज्यादा मदद की।
जबसे भाजपा सत्ता में आई है, वह मनरेगा को हतोत्साहित कर रही है। पहले प्रधानमंत्री जी ने मनरेगा का मजाक उड़ाया, फिर लगातार बजट कम किया। आज 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का 6,366 करोड़ रुपये बकाया है और केंद्र राज्यों को पैसा जारी नहीं कर रहा है। ऐसा करके भाजपा देश के गरीबों और बेरोजगारों का हक मार रही है।





