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पटेल के बाद अब गांधी पर भाजपा का निशाना

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आज पूरे भारत देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। लेकिन इस वर्ष गांधी जी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच प्रतिस्पर्धा भी दिखाई दी। हर कोई बापू के आगे नतमस्तक होना चाह रहा था। लखनऊ में तो भाजपा नेताओं की लाइन लग गई। सवाल यह है कि सत्ता पक्ष की यह हरकत क्या राजनीति है या वाकई गांधी जी के आदर्शों को भाजपा समझ गई है?
गांधी जी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह के द्वारा अत्याचार के खिलाफ खड़े होने वाले नेता थे, जिसकी नींव अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति लोगों को जगाया। सुभाष चन्द्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज़ के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं थीं।
1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद उन्होंने देशभर में गरीबी से राहत दिलाने, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, धार्मिक एवं जातीय एकता का निर्माण व आत्मनिर्भरता के लिये अस्पृश्‍यता के विरोध में अनेकों कार्यक्रम चलाये। गांधी जी ने सभी परिस्थितियों में अहिंसा और सत्य का पालन किया । आज भाजपा गांधी को अपनाने की कोशिश कर रही है। जैसे सरदार पटेल को किया।
यदि भाजपा को कांग्रेसी महापुरुष इतने अच्छे लगते हैं तो कांग्रेस का विरोध क्यूं? या तो कांग्रेस की नीतियों को अपना लें या कांग्रेस में विलय कर लें। यह दोगली राजनीति क्यूं?
अब इस दौर में भाजपा ने गांधी जी पर सियासत भी शुरू कर दी है। सरदार पटेल के बाद गांधी जी को भी भाजपा अपनी सियासी विरासत का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस पार्टी द्वारा गांधी और कांग्रेस के ऐतिहासिक जुड़ावों की स्मृतियों को ताजा करने के लिए गांधी संदेश यात्रा एक सही कदम है। इससे कांग्रेस और गांधीजी के रिश्तों की विरासत दुनिया को पता चलेगी।
लेकिन गोडसे जैसे आतंकी को मानने वाली भाजपा और आरएसएस गांधी के आदर्शो को कैसे समझ सकते हैं! जिस तरह से आज गांधी जयंती के अवसर पर तमाम भाजपा नेता गांधी जी की प्रतिमा के सामने नतमस्तक दिखाई दिए उसने सवाल खड़ा कर दिया कि गांधी के विचारों को लेकर जगा यह भाव वास्तविक है या महज सियासी?
बहरहाल लखनऊ में प्रियंका गांधी के नेतृत्व में जमा हुए कांग्रेसियों द्वारा सरकार को यह संदेश अच्छी तरह दिया गया कि वह कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखना बंद कर दें और साथ ही साथ देशवासियों को भी यह पैगाम दे दिया कि भाजपा की ग़लत नीतियों और दमनकारी हरकतों के खिलाफ कांग्रेस जनता के साथ है वह देशवासियों पर हो रहे अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेगी।
जय हिन्द।

सैय्यद एम अली तक़वी
ब्यूरो चीफ- दि रिवोल्यूशन न्यूज
निदेशक- यूरिट एजुकेशन इंस्टीट्यूट

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