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धीरेन शास्त्री का बकरीद और बलि देने पर बड़ा बयान

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बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री का बकरीद पर बड़ा बयान: जीव हिंसा निंदनीय, सनातन धर्म में बलि प्रथा पर भी उठाए सवाल; हिंदू एकता पदयात्रा में दिग्गजों का साथ
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बकरीद (ईद-उल-अज़हा) के अवसर पर पशु बलि की प्रथा का कड़ा विरोध करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने जीव हिंसा को सभी संप्रदायों, संस्कृतियों और धर्मों में निंदनीय करार दिया और अहिंसा को सर्वोत्तम मार्ग बताया। शास्त्री ने स्वीकार किया कि सनातन धर्म में भी ऐतिहासिक रूप से बलि की परंपरा रही है, लेकिन आधुनिक युग में इसे छोड़कर शांतिपूर्ण और दयालु विकल्प अपनाने की जरूरत है।
उनके इस बयान ने धार्मिक और सामाजिक मंचों पर नई बहस छेड़ दी है। शास्त्री ने कहा, “अगर हम किसी को जीवन नहीं दे सकते, तो हमें मारने का अधिकार भी नहीं है।” उन्होंने सभी समुदायों से जीव हिंसा को रोकने और अहिंसा परमो धर्म के सिद्धांत पर चलने की अपील की।
सनातन धर्म में बलि प्रथा पर शास्त्री का रुख
शास्त्री ने सनातन धर्म में बलि प्रथा को स्वीकार करते हुए कहा कि यह परंपरा ऐतिहासिक संदर्भों में रही हो सकती है, लेकिन समय के साथ बदलाव आवश्यक है। उन्होंने आधुनिक समाज में प्रार्थना, उपचार और सहायता जैसे वैकल्पिक मार्गों को अपनाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि जीव हिंसा को रोकने से सभी धर्मों को लाभ होगा और यह एक नई प्रेरणा देगा कि हर प्राणी को जीने का अधिकार है।
हिंदू एकता पदयात्रा में शामिल प्रमुख हस्तियां
धीरेंद्र शास्त्री ने 21 नवंबर 2024 को बागेश्वर धाम से ओरछा तक 160 किलोमीटर की हिंदू एकता पदयात्रा शुरू की थी, जिसका उद्देश्य हिंदुओं में जातिगत भेदभाव, छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना को खत्म करना था। इस यात्रा में हजारों भक्तों के साथ कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।
संजय दत्त: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने मुंबई से पहुंचकर यात्रा में हिस्सा लिया और शास्त्री की तारीफ करते हुए उन्हें अपना “छोटा भाई” और “गुरु जी” बताया।
ग्रेट खली: प्रसिद्ध पहलवान ग्रेट खली भी इस यात्रा में शामिल हुए और शास्त्री के प्रयासों का समर्थन किया।
टी. राजा: हैदराबाद के हिंदूवादी नेता टी. राजा ने भी यात्रा में हिस्सा लिया और शास्त्री के साथ कदम मिलाए।
राजा भैया: उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) ने बागेश्वर धाम में शास्त्री से मुलाकात की और उनकी सनातन धर्म के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की।
नेपाल से परिवार: यात्रा में नेपाल से आए एक परिवार ने भी हिस्सा लिया, जो हिंदू राष्ट्र की मांग का समर्थन कर रहा था।
यात्रा का प्रभाव और संदेश
पदयात्रा के दौरान शास्त्री ने “जात-पात की करो विदाई, सारे हिंदू भाई-भाई” का नारा दिया और हिंदुओं को एकजुट करने का संदेश दिया। छतरपुर में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के दौरान हजारों लोगों ने उनके इस संदेश का समर्थन किया। यात्रा में 20,000 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया, और दूसरे दिन लगभग 60,000 लोग शामिल हुए।
शास्त्री ने कहा कि हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है और इसे रोकने के लिए सड़कों पर उतरना जरूरी है। उन्होंने “बंटेंगे तो कटेंगे” का नारा दोहराते हुए हिंदू एकता को मजबूत करने का प्रण लिया।
विवाद की संभावना
शास्त्री के बकरीद और बलि प्रथा पर बयान ने धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की संभावना जताई है। पहले भी उनके बयानों पर विवाद हो चुके हैं, जैसे कि शिया-सुन्नी भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप। उनके इस बयान से भी सामाजिक और धार्मिक मंचों पर बहस छिड़ सकती है।
निष्कर्ष
धीरेंद्र शास्त्री का बकरीद और जीव हिंसा पर बयान न केवल धार्मिक परंपराओं पर सवाल उठाता है, बल्कि सनातन धर्म में भी बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित करता है। उनकी हिंदू एकता पदयात्रा में संजय दत्त, ग्रेट खली, राजा भैया जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने इस अभियान को व्यापक समर्थन दिलाया है। यह बयान और यात्रा सनातन धर्म के प्रचार और हिंदू एकता के उनके संकल्प को और मजबूत करते हैं।

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