’’हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर रजि. तलहा अन्हु से फर्माते है कि रसूले (स.व.अ.) ने मूछे छोटी रखने व दाढ़ी बढ़ाने को कहां है।’’
(बअू दाऊद 4199, मुस्लिम शरीफ 259, तिरमिज़ी शरीफ 2764)
दाढ़ी की भी हद है कि सिर्फ एक मुश्त दाढ़ी बढ़ायें..जोकि वाजिब नहीं सुन्नत है।
(बुखारी शरीफ 5892, 5893), (बुखारी जिल्द 2, सफा 87), (मुस्लिम जिल्द 1, सफा 129), (त्रिमीज़ी जिल्द 2, सफा 105)
मुसलमान को दाढ़ी रखना सुन्नत है, लेकिन साथ में मूछे भी, मूछे उतनी बड़ी न हो कि पानी पीते समय मूछ के बाल पानी में डूबे…क्योंकि बालों में गन्दगी फंसी होती हैं। मूछ मूंडने को इस्लाम में कहीं नहीं कहा गया है…, दाढ़ी रखने पर भी खत बनवाने व उसपर कंघी करने को भी कहां गया है।
एस.एन.लाल
अब इसी रौशनी में आप इन्सपेक्टर इंतेसार अली की दाढ़ी और उनके संस्पेंड को देखे। इन्सपेक्टर इन्तेसार अली की दाढ़ी पूरी इस्लामी नहीं नज़र आती, मूछे ग़ायब। दाढ़ी मूछों के साथ ऐसी भी रखी जा सकती है कि हम अलग से नज़र न आये…या अलग से हमारा धर्म देखते ही पता न चले…!, क्योंकि ये कानून की नौकरी है, इसमें हम वाज़े तौर पर कौन है….या किस धर्म से ताल्लुक़ रखते है…, ये नज़र नहीं आना चाहिए..!
एस.एन.लाल
देश में कई पुलिस वाले मूछ के साथ दाढ़ी रखे नज़र आ जाते है…सिखांे को छोड़कर, उनके इस हुलिये से उनके धर्म का पता नहीं चलता..!
अगर सिखों की तरह सभी और हमेशा से दाढ़ी रख रहे होते..तब तो इन्तेसार अली बात जायज़ होती…!
एस.एन.लाल