Home / डा होमी जहांगीर भाभा प्लेन क्रैश में नहीं हुई होती तो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में हम बहुत पहले महारत हासिल कर चुके होते.

डा होमी जहांगीर भाभा प्लेन क्रैश में नहीं हुई होती तो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में हम बहुत पहले महारत हासिल कर चुके होते.

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सीडीएस जनरल बिपिन रावत की हेलिकॉप्टर दुर्घटना ने कई हवाई दुर्घटनाओं की याद दिला दी. ऐसी ही एक हवाई दुर्घटना में हमारे सबसे बड़े परमाणु वैज्ञानिक की मौत हुई थी और उस एक मौत से हमारा परमाणु कार्यक्रम कई वर्ष पीछे चला गया था.

हम बात कर रहे हैं डॉ. होमी जहांगीर भाभा की जो भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम के जनक थे. 1966 में अगर उनकी मौत एक प्लेन क्रैश में नहीं हुई होती तो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में हम बहुत पहले महारत हासिल कर चुके होते.

24 जनवरी 1966 को होमी जहांगीर भाभा एयर इंडिया के फ्लाइट नंबर 101 से सफर कर रहे थे. मुंबई से न्‍यूयॉर्क जा रहा एयर इंडिया का बोइंग 707 विमान माउंट ब्‍लैंक पहाड़ियों के पास हादसे का शिकार हो गया. इस हादसे में होमी जहांगीर भाभा समेत विमान में सवार सभी 117 यात्रियों की मौत हो गई थी.

उस समय से इस हादसे को लेकर कई बातें हुई. कई लोगों का मानना है कि इस विमान को साजिश के जरिए दुर्घटना का शिकार बनाया गया. कुछ लोगों का मानना है कि विमान में बम धमाका हुआ था जबकि कुछ का कहना है कि इसे मिसाइल या लड़ाकू विमान के जरिए गिराया गया था. इसके पीछे तर्क है कि सीआईए ने भारतीय परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए भाभा की हत्या की साजिश रची थी. लेकिन इसे कभी साबित नहीं किया जा सका.

होमी जहांगीर भाभा की रहस्यमय मौत की एक और थ्योरी 2008 में आई. 2008 में एक वेबसाइट ने एक पत्रकार ग्रेगरी डगलस और सीईआए अफसर रॉबर्ट क्राओली के बीच हुई एक बातचीत छापी. इस बातचीत में क्राओली कह रहे थे कि भारत ने 60 के दशक में परमाणु बम पर काम शुरू कर दिया था. जो हमारे लिए समस्या थी. रॉबर्ट के मुताबिक भारत ये सब रुस की मदद से कर रहा था.

इस बातचीत में रॉबर्ट क्राओली ने भाभा को खतरनाक बताया था. क्राओली के मुताबिक भाभा जिस वजह से वियना जा रहे थे, उसके बाद उनकी परेशानी और बढ़ती. कहा जाता है कि इसी वजह से विमान के कार्गो में बम विस्फोट के जरिए उसे उड़ा दिया गया.

कहा जाता है कि अक्टूबर 1965 में भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो से घोषणा की थी कि अगर उन्हें छूट मिले तो भारत 18 महीनों परमाणु बम बनाकर दिखा सकता है. भाभा चाहते थे कि उर्जा, कृषि और मेडिसीन के क्षेत्र में देश की प्रगति के लिए न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम बने.

भाभा ये भी चाहते थे कि देश की सुरक्षा के लिए परमाणु बम बने. कहा जाता है कि भारत की तरक्की को देखते हुए अमेरिका डर गया था. अमेरिका को लग रहा था कि अगर भारत ने परमाणु बम बना लिया तो ये पूरे दक्षिण एशिया के लिए खतरनाक होगा. इसलिए सीआईए ने भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने के लिए भाभा की हत्या की साजिश रची.

अब सच क्या है यह तो कभी पता नहीं चला परन्तु भाभा की असमायिक मौत ने भारतीय न्यूक्लियर प्रोग्राम को कई वर्ष पीछे कर दिया.

  • इतिहासनामा

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