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ट्रंप प्रशासन की विवादास्पद नियुक्तियाँ: पूर्व जिहादी और इस्लामी विद्वान को सलाहकार बोर्ड में शामिल करने पर सवाल

वाशिंगटन, डीसी: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में इस्माइल रॉयर और शेख हमज़ा यूसुफ को यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) सलाहकार बोर्ड में कथित तौर पर नियुक्त किया है।

इस निर्णय ने रॉयर के आतंकवादी अतीत और यूसुफ के कुछ विवादास्पद राजनीतिक रुख के कारण व्यापक विवाद खड़ा कर दिया है।

पत्रकार लॉरा लूमर ने 18 मई 2025 को एक्स पर इस खबर को उजागर किया, जिसके बाद भारत और अन्य समूहों ने चिंता व्यक्त की।
इस्माइल रॉयर: आतंकवाद से सुधार की ओर
इस्माइल रॉयर (जन्म का नाम रैंडल टॉड रॉयर), एक अमेरिकी नागरिक, ने 1992 में इस्लाम धर्म अपनाया। 2000 के दशक की शुरुआत में, उनका नाम “वर्जीनिया जिहाद नेटवर्क” से जुड़ा, जो लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों से संबंधित था। 2003 में, उन्हें हथियारों के अवैध कब्जे और आतंकवादी गतिविधियों में सहायता के आरोप में 20 साल की सजा सुनाई गई। हालांकि, 2016 में उनकी सजा कम हुई, और वह 2018 में रिहा हुए। रिहाई के बाद, रॉयर ने आतंकवाद विरोधी कार्यों में योगदान दिया और कट्टरपंथ के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का काम किया। उनके USCIRF में नियुक्ति के दावे ने सवाल उठाए हैं कि क्या ट्रंप प्रशासन आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता से समझौता कर रहा है।
शेख हमज़ा यूसुफ: इस्लामी विद्वान या विवादास्पद शख्सियत?
शेख हमज़ा यूसुफ, एक प्रसिद्ध अमेरिकी इस्लामी विद्वान और कैलिफोर्निया के ज़ायतुना कॉलेज के सह-संस्थापक, ने 1977 में 18 साल की उम्र में इस्लाम अपनाया। उन्होंने मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में इस्लामी अध्ययन किया और शास्त्रीय इस्लामी शिक्षा को बढ़ावा दिया। 9/11 के आतंकवादी हमलों से उनका कोई संबंध नहीं है, और उन्होंने आतंकवाद की निंदा करते हुए शांति और सहिष्णुता पर जोर दिया है। हालांकि, अरब वसंत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के समर्थन में उनके कुछ बयानों ने आलोचना को आकर्षित किया। यूसुफ का कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से कोई सीधा अकादमिक संबंध नहीं है, लेकिन वह बर्कले में ग्रेजुएट थियोलॉजिकल यूनियन के सेंटर फॉर इस्लामिक स्टडीज़ में सलाहकार रहे हैं। उनकी कथित USCIRF नियुक्ति ने उनके राजनीतिक रुख को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीति पर प्रभाव
अमेरिका ने अल-कायदा, ISIS, लश्कर-ए-तैयविरोधी सहयोग को मजबूत किया। रॉयर और यूसुफ की नियुक्ति ने ट्रंप प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, खासकर भारत जैसे सहयोगी देशों के बीच, जो आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख रखते हैं। कुछ एक्स पोस्ट्स में दावा किया गया कि ट्रंप ने “आतंकवादियों के साथ समझौता” किया, लेकिन यह दावा सट्टा है और सत्यापित नहीं है।
क्या कहता है विश्लेषण?
रॉयर जैसे सुधरे हुए व्यक्तियों को शामिल करना कट्टरपंथ विरोधी रणनीतियों को मजबूत कर सकता है, क्योंकि वे कट्टरपंथी मानसिकता को समझते हैं। हालांकि, रॉयर का अतीत और यूसुफ के विवादास्पद बयान नीतिगत विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं। भारत ने इन नियुक्तियों पर चिंता जताई है, क्योंकि लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
निष्कर्ष और सुझाव
ट्रंप प्रशासन को ऐसी नियुक्तियों में पारदर्शिता और सावधानी बरतनी चाहिए। आतंकवाद विरोधी नीतियों में सुधार और पुनर्वास को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन संवेदनशील भूमिकाओं में नियुक्तियों से पहले गहन जांच आवश्यक है। यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी नियुक्तियाँ सहयोगी देशों और जनता के विश्वास को कम न करें।

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