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टाइम्स ऑफ़ इंडिया ईरानी राष्ट्रपति के लिए बुचर शब्द का इस्तेमाल करने पर मांगे माफी

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ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की शहादत पर,

Times of India Ke YouTube channel per
The Butcher of Tehran is deadi
caption mein likha gaya
उनके लिए buchar/ कसाई शब्द के इस्तेमाल पर शिया क़ौम के नौजवानों और बुजुर्गों मैं रोष है,
इस संबंध में मैंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल कर तमाम मौलानाओ बुद्धिजीवियों को सूचित करने एवं टाइम्स ऑफ़ इंडिया के उच्च अधिकारियों से बातचीत कर ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम राईसी के लिए प्रोफेशनल शब्द को हटवाने की मांग करने को कहा था

लेकिन कल जुम्मे में मौलाना ने चुनाव के संबंध में अपनी अपील पर सफाई दी,

लेकिन नेशनल, इंटरनेशनल मुद्दों पर अपना विरोध की वीडियो जारी करने वाले छोटे बड़े मौलाना इस संबंध में एक शब्द नहीं बोले,
जैसे लग रहा है कि उनका मुंह किसी ने सी दिया है,
या उनको सांप सुंघ गया है,

कुछ हमारे सेकुलर भाइयों ने इस पोस्ट पर लिखा 1988 में तेहरान मे 5000 लोगों को फांसी दी गई थी,
इस संबंध में उनको जिम्मेदार बताया जाता है, इसलिए उनको Buchar क़साई लिखा जाता है,
चाहे तो गूगल सर्च कर लो,

जब मैंने गूगल पर सर्च किया तो पता चला कि जब वो तेहरान के उप अभियोजक deputy prosecutor थे,

तब 2800 – 5000 के बीच विद्रोहियों को ईरानी संविधान के हिसाब से न्यायालय ने फांसी की सजा थी,

जिसके लिए उनको बुचर, कसाई कहा जाता है,
गूगल और सोशल मीडिया के मालिक यहूदी और इसाई है, कहने और लिखने वाले दोनों ईरान और मुस्लिम समाज के कट्टर दुश्मन है,
मै बताना चाहता हूं कि मै इमाम हुसैन व उनके परिवार से मोहब्बत करने वाला हूं,

किसी तरह की नइंसाफी बर्दाश्त करना मेरे खून में नहीं है,
जब तक मेरा रब चाहेगा इंसानियत और मानवअधिकार के लिए मै हमेशा बोलता एवं लिखता रहूंगा,
मैं टाइम्स ऑफ़ इंडिया और अपने सेकुलर भाइयों से पूछना चाहता हूं कि,

हिटलर ने बगैर किसी संवैधानिक कार्रवाई के 60 लाख यहूदियों को कत्ल किया,
जिसमें 15 लाख बच्चे थे, क्यों नहीं बुचर,कसाई लिखा गया ?

वैसे तो हिंदुस्तान में ब्रिटिश हुकूमत ने बहुत मासूम का कत्ले आम किया है,
लेकिन जनरल डायर के आदेश पर निहत्ते भारतीयों पर गोलियां चलाई गई,
जिसमें हजारों लोगों की मौत हो गई,
तो बुचर /कसाई क्यों नहीं लिखा गया?
इराक और अफगानिस्तान में पूर्व अमेरिकन राष्ट्रपति बुश बाप बेटी द्वारा लाखों निहत्ते मुसलमान का नरसिंघार किया गया,
उनको लूटा एवं बर्बाद किया गया,
तो पूर्व अमेरिकन राष्ट्रपति बुश परिवार के लिए बुचर एवं कसाई शब्द क्यों नहीं लिखा गया?

हाल ही में इजराईल प्रधानमंत्री के आदेशानुसार गाजा के निहत्था नागरिकों का कत्लेआम किया जा रहा है, फिलीस्तीन को इजराईल देश की मान्यता नहीं देने दे रहा है
तो उनको बुचर, कसाई क्यों नहीं लिखा गया,

तो खाली ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी शहीद को butcher कसाई लिखने के पीछे क्या षड्यंत्र है,
यह सब जानते हैं ,
लेकिन हमारे देश के ईरान से हमेशा से मधुर संबंध रहे हैं,
जैसा कि मैंने पहले लिखा था,
हमारे उपराष्ट्रपति ने तेहरान पहुंचकर शहीद इब्राहिम रईसी को श्रद्धांजलि अर्पित की,
हमारे प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी द्वारा ईरान के राष्ट्रपति के देहांत पर एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया,
हमारे विदेश मंत्री ने उनकी तारीफ़ कर रहे हैं,
तो इतने अच्छे संबंध होने पर हमारे देश का नामी समाचार पत्र ने मुस्लिम विरोधी षड्यंत्र को समझते हुए अपने यूट्यूब चैनल पर उनको Butcher क्यों लिखा,
हमें मालूम है कि किसी भी चैनल/ समाचार पत्र को चलाने के लिए देश -विदेश से सहायता लेना पड़ती है ,
उस सहायता के दबाव में आप किसी देश के राष्ट्रपति को बुचर , कारपेंटर,प्लंबर मैकेनिक,जिससे उस व्यक्ति का प्रोफेशन दर्शाता है,
इस्तेमाल नहीं करना चाहिए,
, शहीद राईसी के लिए ऐसे प्रोफेशनल शब्द के इस्तेमाल छवि खराब होती है, तो ऐसे शब्द को तुरंत हटाया जाना चाहिए, बात की गंभीरता को ना समझना पर अंतिम चेतावनी देते हुए कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए,
वह मुसलमान को ऐसे पेपर का बॉयकॉट करना चाहिए, ऐसी घोषणा हमारे मौलाना को करनी चाहिए थी,
पर किस वजह से उनके मुंह में ताले लगे हैं,
अल्लाह चाहेगा तो वो सब के सामने आ जाएगा,
लेकिन क़ौम इसका विरोध,

शहीदों के अच्छे चरित्र को ग़लत साबित करने वाले षड्यंत्र की कोशिश ना काम करने के लिए हर मंच से इसका विरोध करेंगे,

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