झारखंड में छात्रों की बड़ी जीत: हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC-CGL समेत TDPL से कराई गई सभी परीक्षाएं रद्द कीं, जांच कमेटी का ऐलान
रांची, 17 अगस्त 2026। झारखंड में लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा फैसला लेते हुए आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। सरकार ने TDPL एजेंसी के माध्यम से आयोजित JSSC-CGL समेत सभी प्रतियोगी परीक्षाओं और उनसे जुड़ी चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों ने राहत की सांस ली और इसे अपनी बड़ी जीत बताया।
TDPL से कराई गई सभी परीक्षाएं निरस्त
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की कि TDPL के माध्यम से आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं और उनके परिणामों को निरस्त किया जाएगा। सरकार का यह निर्णय परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर उठाए गए सवालों के बीच आया है।
छात्र लंबे समय से मांग कर रहे थे कि जिन परीक्षाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं, उन्हें रद्द कर निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा कराई जाए। सरकार के ताजा फैसले से आंदोलनकारी छात्रों की इस प्रमुख मांग पर सहमति बन गई है।
JSSC-CGL समेत चयन प्रक्रियाओं पर बड़ा फैसला
छात्र आंदोलन का सबसे प्रमुख मुद्दा JSSC-CGL परीक्षा को लेकर था। आंदोलनकारी लगातार परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते रहे थे।
अब सरकार ने TDPL के माध्यम से कराई गई परीक्षाओं और उनसे संबंधित परिणामों एवं चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की बात भी कही गई है।
14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाएं भी रद्द
सरकार ने छात्रों की मांगों को स्वीकार करते हुए 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला पहले ही लिया था। अब TDPL से संबंधित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद छात्रों के आंदोलन की प्रमुख मांगों पर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
रिटायर्ड अधिकारियों की जांच कमेटी से होगी जांच
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परीक्षा विवादों की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का आश्वासन दिया है। सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि जांच प्रक्रिया में सेवानिवृत्त अधिकारियों/विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और विश्वसनीय तरीके से पूरी हो सके।
जांच समिति परीक्षा आयोजन, प्रश्नपत्र, परिणाम, चयन प्रक्रिया और एजेंसी की भूमिका से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है।
IIT जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की ली जाएगी मदद
सरकार ने भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने की भी बात कही है।
इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, परीक्षा केंद्रों की निगरानी मजबूत करना और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाना है।
कई सप्ताह से धरने पर बैठे थे छात्र
झारखंड में छात्र पिछले कई सप्ताह से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। रांची में बड़ी संख्या में छात्र धरने पर बैठे थे और सरकार से परीक्षा विवादों का स्थायी समाधान निकालने की मांग कर रहे थे।
छात्रों का कहना था कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवा वर्षों मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता या संदेह की स्थिति उनके भविष्य को प्रभावित करती है। इसलिए वे निष्पक्ष जांच और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे थे।
सरकार के फैसले के बाद छात्रों ने बताया बड़ी जीत
मुख्यमंत्री के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी का माहौल है। छात्रों ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे अपने लंबे आंदोलन की बड़ी जीत बताया है।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाया और आखिरकार सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार किया। हालांकि छात्र अब जांच समिति की कार्रवाई और भविष्य में होने वाली परीक्षाओं की प्रक्रिया पर भी नजर रखेंगे।
आगे की परीक्षा व्यवस्था पर रहेगी नजर
सरकार के फैसले से फिलहाल छात्रों को राहत मिली है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती रद्द की गई परीक्षाओं को निष्पक्ष तरीके से दोबारा आयोजित करना और नई परीक्षा व्यवस्था को भरोसेमंद बनाना होगी।
सरकार द्वारा IIT जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने और उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का आश्वासन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
छात्र आंदोलन का संदेश साफ—निष्पक्ष परीक्षा और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था
झारखंड के छात्र आंदोलन ने एक बार फिर यह मुद्दा सामने ला दिया है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, तकनीकी सुरक्षा और अभ्यर्थियों का भरोसा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ताजा फैसले के बाद अब छात्रों की निगाहें जांच समिति की कार्रवाई और रद्द परीक्षाओं के नए सिरे से आयोजन पर टिकी हैं।
