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ज़ालिम हुक्मरानों के लिए एक नसीहत, एक पैगाम

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मैं बात कर रहा हूं बांग्लादेश की। बांग्लादेश में जो घटित हुआ वह दुनिया के ज़ालिम, ज़िद्दी और घमंडी हुक्मरानों के लिए एक खुली नसीहत भी है और एक खुला पैगाम भी है।

सभी हुक्मरानों को यह याद रखना चाहिए कि देश की जनता की आवाज को दबाने का अंजाम बुरा होता है।
भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में शेख हसीना की तानाशाही सरकार को बांग्लादेश की जनता ने जबरदस्त जवाब दिया, ऐसा जवाब दिया कि देश छोड़कर भागना पड़ा। इतिहास गवाह है कि भगोड़ों को हमेशा हारा हुआ कहा जाता है क्योंकि जो मैदान छोड़कर भाग जाये वह हुक्मरान नहीं कायर होता है।
देश के लिए काम करना एक अलग बात है मगर देश की जनता की आवाज़ को नजरअंदाज़ करना और उसे कुचल देना बिल्कुल अलग है। इसे जनता कभी बर्दाश्त नहीं करती। यह और बात है कि जनता कुछ समय खामोश रहे। लेकिन वक्त आता है।
बांग्लादेश में भी यही हुआ । सब्र का पैमाना छलक गया। लोग अपने जज्बात और दर्द लेकर के सड़कों पर आ गए। फिर क्या हुआ बांग्लादेश का हर व्यक्ति थोड़ी देर के लिए सही देश का बादशाह बन गया। महल में जाकर के खाना भी खाया, स्विमिंग भी की, एंजॉय भी किया और जरूरत का सामान जो मिला वह साथ भी ले गए। यह होता है तानाशाही का अंजाम।
हुक्मरानों को याद रखना चाहिए कि तानाशाही उसी वक्त तक क़ायम रहती है जब तक सिस्टम पैरों में घुंघरू बांध कर बजता रहता है, मीडिया ताक धिना धिन करती रहती है, समर्थकों की दोनों आंखें गुलामी के कीचड़ से भरी रहती हैं और वह अंधभक्त बने रहते हैं, लेकिन जिस दिन यह गुलामी का कीचड़ आंखों से धुलता है और वह देखता है कि पानी गले तक पहुंच गया है, उस दिन तानाशाह को सिर्फ इस्तीफा देकर और महल छोड़कर देश से भागना पड़ता है, या मौत गले लगाना पड़ती है । सदियों का इतिहास इस सच्चाई का गवाह है। चाहे हिट्लर हो, सद्दाम हो या गद्दाफ़ी यह सब एक मिसाल हैं।
बांग्लादेश में भी शेख़ हसीना ने सबसे पहले जन आंदोलन को कुचलने की कोशिश की, फिर आंदोलनकारियों को देशद्रोही कहा , फिर इसे विपक्ष की साज़िश बताया फिर इन्हें आतंकी बताया। आश्चर्य है यह सब चीज जो उन्होंने की आखिर यह उन्होंने कहां से और किस देश से सीखा? यह भी एक सवाल है।
लेकिन इस कार्य का अंजाम क्या हुआ? शेख़ हसीना को बांग्लादेश से भागकर भारत आना पड़ा है। फिलहाल हसीना भारत में कड़ी सुरक्षा के बीच किसी अज्ञात जगह पर हैं। इन सब के बीच शेख हसीना को अमेरिका ने बड़ा झटका दिया है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने शेख हसीना का बीजा रद्द कर दिया है। इसका मतलब है कि हसीना शरण लेने अब अमेरिका के लिए नहीं जा सकेंगी। शेख हसीना की पार्टी के कई सदस्यों और अधिकारियों पर भी वीजा प्रतिबंध लगा दिया गया है।
दूसरी तरफ ब्रिटेन सरकार ने भी संकेत दिया है कि उन्हें किसी भी संभावित जांच के खिलाफ ब्रिटेन में कानूनी सुरक्षा नहीं मिल सकती है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने कहा कि बांग्लादेश ने पिछले कुछ हफ्तों में अभूतपूर्व स्तर की हिंसा और जान-माल की दुखद हानि देखी है और देश के लोग घटनाओं की संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में पूर्ण और स्वतंत्र जांच के हकदार हैं।
याद रखिए जब किसी लोकतांत्रिक देश का हुक्मरान देश के लोकतंत्र का ग़लत मतलब निकालता है तो यही अंजाम होता है। फिर वह हुक्मरान नहीं भगोड़ा साबित हो जाता है। फ़िलहाल सैकड़ों की जान चली गई, बांग्लादेश का नुक़सान हुआ। देश में हाहाकार मच गया। इन सब ने शेख हसीना की राजनीति का शायद अंत कर दिया है। बहरहाल वक्त बहुत ताकतवर होता है। इंतेज़ार कीजिए।

सैयद एम अली तक़वी
पत्रकार एवं लेखक

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