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जब अमिताभ बच्चन की हीरोइन को सुनाई गई जेल की सजा, 70- 80s में था एक्ट्रेस का जलवा, साउथ में भी मचाया धमाल

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1970 से 1980 के दशक की हीरोइन ललिता रानी राव भारतीय सिनेमा का बड़ा नाम है और उन्हें लोग जया प्रदा के नाम से जानते हैं. 3 अप्रैल 1962 को जन्मी जया न सिर्फ एक अभिनेत्री बल्कि एक राजनीतिज्ञ भी हैं. उन्हें 70 के दशक के अंत, 80 के दशक और 90 के दशक की शुरुआत में तेलुगु और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है. लेकिन विवादों से अछूती वे भी नहीं और इसी साल के मिड में मामला इतना बड़ गया था कि उन्हें 6 माह जेल की सजा भी सुनाई गई।

अगस्त 2023 में जया प्रदा को चेन्नई की एक अदालत ने दोषी पाया है और उन्हें 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी. साथ ही अभिनेत्री पर 5 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया गया था. दरअसल, कोर्ट ने उनके बिजनेस पार्टनर राम कुमार और राजा बाबू को भी दोषी पाया था, इसलिए उन्हें भी सजा सुनाई गई थी।

जया प्रदा चेन्नई में एक थिएटर चलाती थीं, जिसे बाद में उन्होंने बंद कर दिया. इसके बाद उनके थिएटर में काम करने वाले कर्मचारियों ने जया के खिलाफ आवाज उठाई और उन्हें वेतन और ईएसआई के पैसे का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया. उनका आरोप था कि सरकारी बीमा निगम को ईएसआई का पैसा नहीं दिया गया।

विवाद बढ़ने पर लेबर गवर्नमेंट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन’ ने जया प्रदा और उनके सहयोगियों के खिलाफ चेन्नई के एग्मोर मजिस्ट्रेट कोर्ट में मामला दायर किया. बाद में जया प्रदा ने कोर्ट के सभी आरोपों को स्वीकार करते हुए थिएटर के स्टाफ को बकाया पैसे का भुगतान करने का वादा किया था. उन्होंने कोर्ट से मामले को खारिज करने की भी अपील की थी लेकिन अदालत ने उनके अनुरोध को ठुकरा दिया और उन्हें 5 हजार रुपये के जुर्माने के साथ 6 महीने जेल की सजा सुनाई थी।

बात अगर वर्क फ्रंट की करें जया प्रदा ने अपने अभिनय को लोहा हर ओर मनवाया है फिर चाहे वो नॉर्थ हो या साउथ. वे हर इंडस्ट्री के लोगों के दिलों को जीतने में कामयाब रहीं. जया प्रदा 3 दक्षिण फिल्मफेयर पुरस्कारों की प्राप्तकर्ता हैं और उन्होंने कई तेलुगु और हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कई कन्नड़, तमिल, मलयालम, बंगाली और मराठी फिल्मों में अभिनय किया है।

जया प्रदा ने अपने करियर के चरम पर फिल्म उद्योग छोड़ दिया, क्योंकि वे 1994 में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) में शामिल हो गईं और राजनीति में प्रवेश किया. वे 2004 से 2014 तक उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद रहीं.उनकी कुछ बेहतरीन फिल्मों में एंथुलेनी कथा (1976), सिरी सिरी मुव्वा (1976), सीता कल्याणम (1976), अदावी रामुडु (1977), यामागोला (1977), सनदी अप्पन्ना (1977), हुलिया हलीना मेवु (1979), सरगम शामिल हैं। (1979), ओरिकी मोनागाडु (1981), कामचोर (1982), कविरत्न कालिदास (1983), सागर संगमम (1983), तोहफा (1984), शराबी (1984), मकसद (1984), संजोग (1985), आखिरी रास्ता ( 1986), सिंहासनम (1986), सिन्दूर (1987), संसारम (1988), एलान-ए-जंग (1989), आज का अर्जुन (1990), थानेदार (1990), मां (1991), हब्बा (1999), शब्दवेधी (2000), देवदूथन (2000), प्राणायाम (2011), ई बंधन (2007) और क्रांतिवीरा संगोल्ली रायन्ना (2012) हैं. सागर संगमम में अपने अभिनय के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ तेलुगु अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता. सिरी सिरी मुव्वा और एंथुलेनी कथा में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। कई लोगों ने उन्हें भारतीय सिनेमा के अब तक के सबसे खूबसूरत चेहरों में से एक माना है, जिसमें सत्यजीत रे भी शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें ‘भारतीय स्क्रीन पर सबसे खूबसूरत चेहरा’ कहा था।

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