19 जून 2025 को ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने इजरायल के सोरोका मेडिकल सेंटर को भी निशाना बनाया, जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों, बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं सहित कई लोग घायल हुए। इस हमले ने इजरायल में आक्रोश पैदा कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई यूजर्स ने इस हमले की निंदा की, जिसमें इसे “अमानवीय” और “इस्लामिक आतंकवाद” का उदाहरण बताया गया। कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया कि इजरायल ने ईरान के अस्पतालों पर हमला किया था, जिसके जवाब में ईरान ने यह कार्रवाई की। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोरोका अस्पताल और रिहायशी इलाकों पर हमले की कड़ी निंदा की और कहा, “ईरान ने हमारे नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर बड़ी गलती की है। उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हमारा जवाब जबरदस्त और निर्णायक होगा।” नेतन्याहू ने यह भी दोहराया कि इजरायल का लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करना, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को खत्म करना और क्षेत्र में “आतंक की धुरी” को समाप्त करना है।
ईरान के हमलों में तेल अवीव के बंदरगाहों और हाइफा की रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा, जबकि इजरायल के आयरन डोम और ऐरो-3 डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को हवा में नष्ट किया। फिर भी, कुछ मिसाइलें आवासीय क्षेत्रों और सैन्य मुख्यालयों को नुकसान पहुंचाने में कामयाब रहीं। ईरान ने दावा किया कि उसने इजरायल के तीन लड़ाकू विमानों को मार गिराया और दो पायलटों को बंधक बनाया, लेकिन इजरायल ने इन दावों का खंडन किया।
दूसरी ओर, इजरायल ने ईरान के तेल कुओं, मशहद हवाई अड्डे, नतांज परमाणु केंद्र और तबरीज व करमानशाह के मिसाइल बेसों को नष्ट कर दिया, जिससे ईरान को भारी नुकसान हुआ। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 13 जून से अब तक इजरायली हमलों में 224 लोग मारे गए और 1,277 घायल हुए, जिनमें 90% आम नागरिक हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा, “इजरायल को उसकी आक्रामकता का कड़ा जवाब मिलेगा।”
इस बीच, अमेरिका ने इजरायल के समर्थन में मिसाइल हमलों को रोकने में मदद की, जबकि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की। भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए ईरान और इजरायल में एडवाइजरी जारी की।
निष्कर्ष:
इजरायल और ईरान के बीच यह सैन्य टकराव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन गया है। दोनों देशों के बीच बढ़ती हिंसा और जवाबी कार्रवाइयों से तेल की कीमतों में 6% से अधिक की वृद्धि हुई है, और होर्मूज की खाड़ी के बंद होने की आशंका जताई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से हमले रोकने की अपील की है, लेकिन अभी युद्धविराम की कोई संभावना नहीं दिख रही।
ईरान की जवाबी कार्रवाई में इजरायल के शहरों में जोरदार धमाके, अस्पताल भी चपेट में; नेतन्याहू ने दी कड़े जवाब की चेतावनी



