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अहलेबैत का रास्ता और उनका वसीला दुनिया की कामयाबी और आख़िरत में नजात मौलाना सैफ अब्बास

हुसैनिया जन्नत मआब सैयद तक़ी साहब में ‘अशरा-ए-मुहर्रम’ की पहली मजलिस को मोलाना सैफ अब्बास नकवी ने”अहलेबैत (अ.) – नजात का रास्ता” के विषय पर ख़िताब करते हुए मौलाना ने कहा कि अहलेबैत का रास्ता और उनका वसीला दुनिया की कामयाबी और आख़िरत में नजात का सबब बनता है।

मौलाना ने सूरह बक़रह की आठवीं आयत को सर-नामा क़रार देते हुए फ़रमाया कि परवरदिगार-ए-आलम सिर्फ़ तौहीद, रिसालत और क़यामत पर ईमान रखने वाले के मोमिन होने की नफ़ी कर रहा है। इसका मतलब यह है कि कोई एक ऐसी चीज़ है जो इंसान को मोमिन बनाती है — जो कि सिर्फ़ तौहीद, रिसालत और क़यामत से हटकर है।

इसी के साथ मौलाना ने विलायत-ए-अहलेबैत (अ.) की पैरवी करने वालों और उनके नक़्श-ए-क़दम पर चलने वालों की ख़ुसूसियत को बयान करते हुए कहा कि आज दुनिया बहुत अच्छे तरीक़े से देख रही है कि 57 मुस्लिम ममालिक में से सिर्फ़ कुछ ममालिक — जैसे ईरान, लेबनान और इराक़ — हैं जो अहलेबैत (अ.) के रास्ते पर साबित क़दम रहते हुए तमाम मुनाफ़िक़ीन और कुफ़्फ़ार के सामने डटे हुए हैं।
जबकि बाक़ी के वो तमाम ममालिक, जो सिर्फ़ तौहीद, रिसालत और क़यामत का मुँहबोला अक़ीदा रखते हैं, उनमें से किसी में इतनी जुर्रत नहीं है कि वो बातिल का सामना कर सके।

आख़िर में मौलाना ने जनाबे मुस्लिम का कूफ़ा जाना, और कूफ़ावालों द्वारा जनाबे मुस्लिम से दग़ा करके उन्हें गिरफ़्तार करवाना, और इब्ने ज़ियाद (ल.) के हाथों उनकी दर्दनाक शहादत का ज़िक्र-ए-मसाइब बयान किया, जिसे सुनकर अज़ाख़ाने में मौजूद मोमिनीन ने गिरया व मातम किया।

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