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अल्पसंख्यक कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने किया दौरा, भेजी प्रियंका गांधी को जांच रिपोर्ट

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लखनऊ, 8 जून।

कांग्रेस ने शामली के थाना झिंझाना अंतर्गत टपराना गांव में विगत 25 मई को ईद के दूसरे दिन मुसलमानों पर पुलिस द्वारा किये गए बर्बर हमले में शामिल पुलिस कर्मियों को तत्काल निलंबित कर पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस ने भय के कारण गांव से भागे मुस्लिम परिवारों को वापस बुलाने और सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है।

कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज आलम ने जारी विज्ञप्ति में कहा है कि टपराना जैसी घटना, जिसमें पुलिस ने न सिर्फ मुसलमानों को मारा पीटा, घरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की जिसके चलते गांव के 35 घरों के लोगों को गांव से भाग जाना पड़ा उसके लिए सीधे मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने के आरोपी रहे मुख्यमंत्री पुलिस को मुस्लिम विरोधी साम्प्रदायिक गिरोह में तब्दील कर देने पर तुले हुए हैं।

शाहनवाज आलम ने कहा कि विगत 5 जून को अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने गांव का दौरा कर उन्हें रिपोर्ट सौंपी है जिसे कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जी को भेजा गया है। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने एक वांछित अपराधी को पकड़ने के लिए गांव में दबिश दी थी। जिसे पकड़ने के बाद पुलिस ने साम्प्रदाय सूचक गालियां देते हुए गांव के सभी मुसलमानों के साथ गाली गलौच किया। जिसकी शिकायत लोगों ने प्रभारी निरीक्षक से की। जिसके बाद प्रभारी निरीक्षक ज्ञानेंद्र सिंह ने गांव के ही जमशेद नामक व्यक्ति के घर पर गांव वालों के सामने माफी मांगी और भविष्य में पुलिस की तरफ से ऐसी कोई गलती नहीं होने का आश्वासन दिया और कहा कि ऐसी हरकत करने वाले थाने के सभी स्टाफ को वो शाम तक बदल देंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और दूसरे दिन 26 मई को रात 12 बजे, 1 बजे और 4 बजे भोर में पुलिस की वर्दी में मुंह बांधे करीब 100 लोगों ने जिनमें से कई बिना वर्दी के बाहरी लोग भी थे, इकट्ठा हुए। उन्होंने पहले बिजली काटी फिर मुसलमानों के घरों में जबरन घुस कर तोड़फोड़ और नगदी और जेवरों की लूटपाट की। इस दौरान महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को को भी लाठी, डंडे और राइफल की बटों से पीटा। जिसमें करीब 2 दर्जन लोग बुरी तरह घायल हो गए। पुलिस उन्हें पीटने के बाद 31 लोगों को पकड़ कर भी ले गयी जिसमें कई नाबालिग बच्चे भी हैं। पुलिस ने अवैध तरीके से उठाए गए इन लोगों को कहां रखा है इसकी जानकारी भी उनके परिजनों को नहीं है। भय और दहशत के कारण 35 मुस्लिम परिवार गांव छोड़ कर भागने को मजबूर हो गए। वहीं पुलिस गांव में रह गई महिलाओं को रोज धमकी दे रही है कि किसी को भी इसके बारे में बताया तो फिर से उन्हें पीटा जाएगा।

शाहनवाज आलम ने आरोप लगाया कि मुसलमानों पर हुए इस हमले में पुलिस के साथ ही स्थानीय साम्प्रदायिक तत्व भी शामिल थे। जिन्हें सरकार का संरक्षण मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि कई मुस्लिम विरोधी दंगों के आरोपी रहे मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ की सरकार में हुए हर मुस्लिम विरोधी हिंसा में पुलिस को अपराधियों की तरह अपने मुंह पर कपड़ा क्यों बांधना पड़ता है? अगर ये वास्तव में पुलिस ही होते हैं और कानून के तहत कोई कार्यवाई करते तो उन्हें मुहं छुपा कर ऐसा क्यों करना पड़ता है?

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