बरेली की एक युवती, जिसका सपना कभी IAS बनने का था, आठ साल की तैयारी के बाद मंजिल तक नहीं पहुंची। इसके बाद उसने खुद को अफसर घोषित कर दिया और फर्जी पहचान, लग्जरी SUV, अफसरों जैसी बॉडी लैंग्वेज और बैंक खाते में लाखों रुपये दिखाकर लोगों को गुमराह करने लगी।
उसने ऐसा रुतबा बनाया कि आसपास के लोग उसे वास्तविक प्रशासनिक अधिकारी समझते रहे और सलाम ठोकते रहे। मामला अब सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र और समाज दोनों के लिए यह एक गंभीर चेतावनी बन गया है कि केवल बाहरी दिखावे और प्रभावशाली व्यवहार के आधार पर किसी की पहचान पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
प्रशासन के लिए सबक
यह प्रकरण प्रशासन के लिए भी एक महत्वपूर्ण सवाल छोड़ता है कि आखिर कोई व्यक्ति इतने समय तक फर्जी अधिकारी बनकर कैसे लोगों को भ्रमित करता रहा। समाज में बढ़ती दिखावटी सत्ता, सोशल मीडिया प्रभाव और अफसराना अंदाज़ के जरिए ठगी का यह नया तरीका चिंता बढ़ाने वाला है।
बरेली की ‘मैडम कलेक्टर’ का फर्जीवाड़ा: अफसर बनकर रुतबा, लग्जरी SUV और लाखों की ठगी





