असली देश प्रेम इसे कहते हैं… मुदकमे के दौरान जज “शहीद उमर मुख्तार” से पूछता है, जज : क्या तुम मानते हो कि तुमने बग़ावत की है उमर मुख्तार : हाँ जज __ क्या तुम जानते हो इसकी सज़ा क्या हो...
1994 में दूरदर्शन पर ” तहकीकात ” नामक क्राइम ड्रामा सीरियल का प्रसारण हुआ था. उस सीरियल में मुख्य भूमिका में नज़र आए थे दिवंगत मशहूर दिग्दर्शक और अभिनेता विजय आनंद जी और उनके सहायक दिली दो...
तस्वीर बड़ी पुरानी है। दिलीप कुमार बैटिंग कर रहे हैं और मुकरी विकेट कीपिंग। मुकरी। किसी ज़माने के नामी कॉमेडियन। वैसे तो मुकरी जी को शराबी फिल्म के उनके किरदार नत्थुलाल के नाम से अधिक जाना जाता है। ले...
साल 1929 था भगत सिंह के असेंबली में बम फेंकने के बाद कोई भी अंग्रेजों के डर से भगत सिंह के परिवार वालों को शरण नही दे रहा था। उस मुश्किल वक़्त मे क्रांतिकारी मौलाना हबीबुर्रहमान लुधयानवी ने परिवार वालो...
रक्षा बंधन का त्योहार भाई और बहन के बीच के बंधन को मजबूत करने वाला पर्व है। इस त्योहार को मनाने की शुरुआत कब हुई, यह कहना कठिन है। इतिहास के पन्नो में रक्षा बंधन से जुड़े कई ऐसी कहानिया दर्ज हैं, जो इस...
1952 में प्रथम चुनाव में जब बाबासाहब अम्बेडकर चुनाव हारे थे और एक दूसरा अछूत बोरकर चुनाव जीते तब बोरकर बाबासाहब अम्बेडकर से मिलने गये। तो उन्होंने बाबासाहब अम्बेडकर से मुस्कुराते हुए कहा कि साहब आज मै...
जांनिसार अख्तर को लोग अक्सर जावेद अख्तर के पिता के रूप में संबोधित करते हैं, लेकिन मेरा मानना ये है कि जांनिसार अख्तर की वो शख्सियत थी, जो किसी के नाम की मोहताज नहीं है। वह जावेद अख्तर से कहीं ज्यादा ...
1868 ई. में भीषण अकाल पड़ा, तब मेवाड़ के महाराणा शम्भूसिंह ने उस ज़माने के लाखों रुपए खर्च करके बाहर से अनाज मंगवाया। इस अकाल में 11 लाख 63 हज़ार लोगों को उदयपुर में भोजन करवाया गया। अकाल के वक्त हैजा की ...
18 August 1945 अप्रैल 1941 में बोस नाजी जर्मनी पहुंचे, जहां उन्हें अंग्रेजों से शत्रुता की वजह से भारत की स्वतंत्रता के लिए उनके प्रयासों को अप्रत्याशित रूप से सहानुभूति मिली। बर्लिन में “फ़्री इंडिया...
जनपद कौशांबी के 24 गांव मैं उठने वाले 22 कदीम ताजिये 3 साल से नहीं उठ पा रहे थे, मुस्लिम विद्वान सैयद अब्बास खुरासानी साहब ने बताया के आयतुल्लाह गुफरानमाब ने वहां ताजियादारी शुरू कराई थी और उसी दौर से...









