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अहलेबैत अ स वह चिराग-ए-हिदायत हैं मौलाना सैफ अब्बास

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इमामबाड़ा जन्नत मआब सैयद तकी साहब में अशरए मुहर्रम की तीसरी मजलिस को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी साहब ने “अहलेबैत नजात का रास्ता” विषय पर अपने संबोधन में कहा कि अहलेबैत अ स वह चिराग-ए-हिदायत हैं जो हर दौर में मानवता को अंधकार से निकालकर निजात की ओर बढ़ने का मार्ग दिखाने का जरिया हैं।
उनकी सीरत, उनकी कुर्बानियाँ और उनका पैग़ाम हमेशा मानवता के लिए एक प्रकाश डालने का काम करता है। मौलाना ने अपने बयान में कहा कि ग़दीर में विलायत का इकरार केवल इतिहास की एक कहानी नहीं है, बल्कि यह कयामत तक आने वाले मानवता के लिए एक संदेश है, जिसमें हक़, सच्चाई, न्याय और इस्लाम की बक़ा के लिए हर क़ीमत अदा की जा सकती है।अगर हम वास्तविक नजात चाहते हैं तो हमें अहलेबैत के नक्शे कदम पर चलना होगा। उनकी शिक्षाओं में मुहब्बत, समझ, कुर्बानी और सब्र की वे मिसालें हैं जो मनुष्य को न केवल आध्यात्मिक रूप से उच्च बनाती हैं, बल्कि सांसारिक कल्याण और आखिरत में नजात का भी साधन बनती हैं।”

अंत में मौलाना ने हज़रत मुस्लिम के दो मासूम यतीम बच्चों हज़रत मुहम्मद और हज़रत इब्राहिम की कोफा में दर्दनाक शहादत का वर्णन किया, जिसे सुनकर अज़ादारों ने ग़म और मातम किया।

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