केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर एक बयान दिया है, जिसमें उन्होंने संविधान से ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि ये भावनाएं भारतीय संस्कृति में पहले से ही मौजूद हैं, इसलिए संविधान में इन शब्दों की कोई खास जरूरत नहीं है।
*शिवराज सिंह चौहान के तर्क:*
– *सर्वधर्म समभाव*: उन्होंने कहा कि सर्वधर्म समभाव भारतीय संस्कृति का मूल है, न कि धर्मनिरपेक्षता। उनका कहना है कि भारत हमेशा से सभी धर्मों को समान रूप से सम्मान देने वाला देश रहा है।
– *समाजवाद की आवश्यकता नहीं*: उन्होंने कहा कि समाजवाद की आत्मवत सर्वभूतेषु अपने जैसा सबको मानो, यह भारत का मूल विचार है। इसलिए, समाजवाद शब्द की आवश्यकता नहीं है।
– *प्राचीन ग्रंथों का हवाला*: उन्होंने प्राचीन ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता की भावनाएं पहले से ही मौजूद हैं ¹ ².
*विपक्षी प्रतिक्रिया:*
– *कांग्रेस की प्रतिक्रिया*: कांग्रेस नेताओं ने शिवराज सिंह चौहान के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इससे साफ है कि भाजपा और आरएसएस लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते और संविधान को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
– *समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया*: समाजवादी पार्टी के नेता राजेंद्र चौधरी ने भी शिवराज सिंह चौहान के बयान की आलोचना की है और कहा कि इससे समाज में तनाव बढ़ सकता है ³.





