लखनऊ के गफरान्माब इमामबाड़े में इस बार प्रथम मोहर्रम की मजलिस में निजामत की जिम्मेदारी शकील शम्सी साहब ने संभाली। बीते वर्ष इस इमामबाड़े की मजलिसों में एक राजनीतिक पार्टी के सदस्यों द्वारा निजामत किए जाने का मुद्दा उठा था, जिसका विरोध हाय मतमीन की अंजुमनों और इमामे जुमा मौलाना कल्बे जवाद से मिलकर किया था। मौलाना ने तब आश्वासन दिया था कि इस अशरे की निजामत किसी भी राजनीतिक पार्टी के सदस्य को नहीं सौंपी जाएगी। उनके आश्वासन के अनुरूप, इस वर्ष शकील शम्सी साहब को निजामत की जिम्मेदारी दी गई, जिसका पुराने लखनऊ और अन्य शहरों से आए लोगों ने स्वागत किया और अल्लाह का शुक्र अदा किया।
धार्मिक आयोजनों में एकता और पवित्रता बनाए रखने के लिए सभी से अपील है कि धार्मिक मसलों को राजनीति से दूर रखा जाए, ताकि भाईचारे और शांति का संदेश मजबूत हो सके।
लखनऊ में मोहर्रम की मजलिस में शकील शम्सी की निजामत, धार्मिक एकता की मिसाल



