न्यू यॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करने के बाद, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रशासन के तहत कई विवादास्पद नीतिगत निर्णय लिए। इनमें से एक प्रमुख निर्णय हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) की मान्यता को रद्द करना था, जिसके परिणामस्वरूप हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को 2025-2026 शैक्षणिक सत्र से अंतरराष्ट्रीय छात्रों का नामांकन करने से रोक दिया गया। इस निर्णय ने विश्वविद्यालय में पढ़ रहे लगभग 6,800 विदेशी छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया, जिनमें भारत के 788 और चीन के 2,126 छात्र शामिल हैं।
ट्रंप प्रशासन का निर्णय
1. हार्वर्ड पर प्रतिबंध का कारण
ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर “हिंसा को बढ़ावा देने, यहूदी-विरोधी गतिविधियों को सहन करने, और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ तालमेल रखने” का आरोप लगाया। गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने दावा किया कि हार्वर्ड ने कैंपस में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों और इजरायल विरोधी माहौल से संबंधित रिकॉर्ड और ऑडियो-विजुअल सामग्री प्रदान करने से इनकार किया, जिसे प्रशासन ने “नस्लवादी” और “यहूदी छात्रों के प्रति शत्रुतापूर्ण” करार दिया।
2. निर्णय का प्रभाव
हार्वर्ड में पढ़ रहे लगभग 6,800 अंतरराष्ट्रीय छात्रों (कुल छात्रों का 27%) को अन्य संस्थानों में स्थानांतरित होने या अपनी कानूनी स्थिति खोने का जोखिम उठाना पड़ सकता था।
इन छात्रों में भारत, चीन, कनाडा, दक्षिण कोरिया, और अन्य देशों के छात्र शामिल हैं।
हार्वर्ड के $53.2 बिलियन के एंडोमेंट और शैक्षणिक स्वायत्तता पर भी इस निर्णय का गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका थी।
3. ट्रंप प्रशासन की शर्तें
प्रशासन ने हार्वर्ड को कुछ शर्तें पूरी करने पर प्रतिबंध हटाने की संभावना दी थी। इनमें यहूदी-विरोधी गतिविधियों से संबंधित रिकॉर्ड जमा करना और प्रशासन की मांगों का पालन करना शामिल था। हालांकि, हार्वर्ड ने इन शर्तों को “अवैध” और “प्रतिशोधात्मक” करार देते हुए अस्वीकार कर दिया।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम को “गैरकानूनी” और “अकादमिक स्वायत्तता पर हमला” करार दिया। यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट एलन एम. गार्बर ने बयान जारी कर कहा कि यह निर्णय न केवल हार्वर्ड बल्कि पूरे अमेरिकी उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए खतरा है। हार्वर्ड ने निम्नलिखित कदम उठाए:
कानूनी कार्रवाई: हार्वर्ड ने बोस्टन की एक फेडरल कोर्ट में ट्रंप प्रशासन के निर्णय को चुनौती दी और अस्थायी निरोधक आदेश (temporary restraining order) की मांग की।
विदेशी छात्रों का समर्थन: यूनिवर्सिटी ने अपने 6,800 अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आश्वासन दिया कि वे समुदाय का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
कोर्ट का निर्णय
23 मई, 2025 को, अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के दाखिले पर रोक लगाने के फैसले को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।
जज का फैसला: जज एलिसन बरोज, जो पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नियुक्त की गई थीं, ने हार्वर्ड की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका दायर होने के कुछ घंटों बाद ही यह निर्णय आया।
जज की टिप्पणी: कैलिफोर्निया के उत्तरी जिले के लिए यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज जेफरी व्हाइट ने 21 पन्नों की विस्तृत राय में फेडरल अधिकारियों की आलोचना की, जिसमें कहा गया कि उनके कार्यों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कानूनी स्थिति पर “समान रूप से कहर बरपाया है।”
प्रभाव: इस अस्थायी रोक के कारण हार्वर्ड को फिलहाल विदेशी छात्रों को दाखिला देने की अनुमति है, लेकिन मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, और अंतिम निर्णय बाकी है।
अन्य संबंधित विवाद
ट्रंप प्रशासन के इस कदम को कई विशेषज्ञों और डेमोक्रेट सांसदों ने “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया। डेमोक्रेट सांसद जेमी रास्किन ने इसे “हार्वर्ड की स्वतंत्रता और अकादमिक स्वायत्तता पर असहनीय हमला” बताया। अमेरिकन इमिग्रेशन काउंसिल के विशेषज्ञ आरोन रीचलिन-मेलनिक ने कहा कि ट्रंप प्रशासन निर्दोष छात्रों को अपनी राजनीतिक रणनीति का शिकार बना रहा है।
ट्रंप प्रशासन के अन्य प्रमुख निर्णय
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर प्रतिबंध के अलावा, ट्रंप प्रशासन ने अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में कई अन्य विवादास्पद कदम उठाए:
मेक्सिको की खाड़ी का नामकरण: ट्रंप ने मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर “गल्फ ऑफ अमेरिका” करने का कार्यकारी आदेश जारी किया। साथ ही, अलास्का की डेनाली चोटी का नाम बदलकर “माउंट मैकिन्ले” कर दिया गया। ये निर्णय उनके राष्ट्रवादी एजेंडे का हिस्सा माने जा रहे हैं।
अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई: ट्रंप प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त नीति अपनाई, जिसमें 205 भारतीयों सहित कई लोगों को निर्वासित किया गया।
अन्य विश्वविद्यालयों पर नजर: गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने संकेत दिया कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी जैसे अन्य संस्थानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है।
भारत पर प्रभाव
हार्वर्ड में पढ़ रहे 788 भारतीय छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता मंडरा रही थी, क्योंकि उन्हें या तो अन्य संस्थानों में स्थानांतरित होना पड़ता या अमेरिका छोड़ना पड़ता। कोर्ट के अस्थायी निर्णय ने इन छात्रों को तात्कालिक राहत दी है, लेकिन अंतिम फैसले का इंतजार है।
वर्तमान स्थिति
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखने का फैसला किया है।
कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई होगी, जिसमें यह तय होगा कि प्रतिबंध स्थायी रूप से हटाया जाएगा या नहीं।
यह विवाद ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों के बीच तनाव को दर्शाता है, जो भविष्य में और बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
ट्रंप प्रशासन का हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के दाखिले पर रोक लगाने का निर्णय एक राजनीतिक और शैक्षणिक विवाद का केंद्र बन गया है। कोर्ट के अस्थायी निरोधक आदेश ने हार्वर्ड और इसके 6,800 अंतरराष्ट्रीय छात्रों को राहत दी है, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। यह निर्णय न केवल हार्वर्ड बल्कि पूरे अमेरिकी उच्च शिक्षा क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है।
स्रोत:
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ट्रंप के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के एडमिशन के रोक के आदेश को फेडरल कोर्ट ने अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया




