पोप फ्रांसिस के निधन की खबर वाकई दुखद है। 88 वर्ष की आयु में, लंबी बीमारी (फेफड़ों और किडनी के गंभीर संक्रमण) के बाद 21 अप्रैल, 2025 को वेटिकन में उनका निधन हो गया। वह पहले लैटिन अमेरिकी और जेसुइट पोप थे, जिन्होंने 2013 से कैथोलिक चर्च का नेतृत्व किया। उनके प्रगतिशील दृष्टिकोण ने चर्च में समावेशिता, सामाजिक न्याय, और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों को बढ़ावा दिया, जिससे वह रूढ़िवादियों के बीच विवादास्पद लेकिन विश्व भर में सम्मानित रहे।
उनके निधन से कैथोलिक चर्च में प्रगतिशील सुधारों की गति पर असर पड़ सकता है, क्योंकि उनके द्वारा नियुक्त 80% कार्डिनल्स अब अगले पोप का चयन करेंगे। हालांकि, उनकी विरासत—गरीबों की सेवा, समलैंगिक अधिकारों पर नरम रुख, और यौन शोषण के खिलाफ सख्ती—चर्च को लंबे समय तक प्रभावित करेगी।
विश्व नेताओं, जैसे भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ने उनकी करुणा और मानवता की प्रशंसा की है। अब वेटिकन में 15-20 दिनों के भीतर नया पोप चुनने के लिए कॉन्क्लेव शुरू होगा, जिसमें कार्डिनल्स के बीच रूढ़िवादी और प्रगतिशील धड़ों के बीच तनाव देखने को मिल सकता है।
पोप फ्रांसिस की शिक्षाएं और शांति का संदेश हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। उनकी आत्मा को शांति मिले।
पोप फ्रांसीसी का 88 साल की आयु में निधन




