कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ एकजुटता व्यक्त की है, यह बयान ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद सामने आया। ओटावा ने भी क्षेत्र में हालात बिगड़ने से रोकने के लिए तनाव कम करने और कूटनीति को प्राथमिकता देने की अपनी अपील दोहराई है।
क्या कहा गया
मार्क कार्नी ने हमले के बाद UAE के प्रति समर्थन जताते हुए संकेत दिया कि कनाडा इस कठिन समय में उसके साथ खड़ा है। इस संदेश के साथ कनाडा ने यह भी साफ किया कि वह पश्चिम एशिया में किसी भी तरह के सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और संयम का पक्षधर है।
हमले के बाद बढ़ी चिंता
ईरान द्वारा मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबर ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे हमले न केवल UAE की सुरक्षा के लिए चुनौती हैं, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का जोखिम भी बढ़ाते हैं।
ओटावा की अपील
कनाडा ने अपने बयान में साफ कहा कि मौजूदा स्थिति में सबसे जरूरी कदम तनाव को कम करना है। ओटावा का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सिर्फ कूटनीतिक प्रयासों से ही हासिल की जा सकती है, न कि टकराव से।
क्षेत्रीय असर
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि पश्चिम एशिया में कोई भी सैन्य कार्रवाई व्यापक असर डाल सकती है। खाड़ी देशों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दे ऐसे तनाव से प्रभावित हो सकते हैं।
आगे की स्थिति
फिलहाल कनाडा और अन्य देशों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्षेत्र में स्थिति कितनी तेजी से सामान्य की जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता यही मानी जा रही है कि किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई से बचा जाए और बातचीत के रास्ते खोले जाएं।
कनाडा ने UAE के साथ जताई एकजुटता, क्षेत्र में तनाव कम करने पर जोर





