लखनऊ: 31 मार्च, 2025 को होने वाली ईद-उल-फितर की नमाज के सिलसिले में और वक्फ संशोधन बिल, 2024 के खिलाफ शाही इमाम, मुतवल्ली सज्जादह नशीन टीले वाली मस्जिद, लखनऊ, हजरत मौलाना कारी सैयद फजलुल मन्नान रहमानी साहब ने एक खास अपील जारी की है।
यह अपील मुस्लिम समुदाय के लिए एकजुटता और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता का संदेश देती है।
शाही इमाम ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल, 2024 में प्रस्तावित बदलाव मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। उन्होंने इस बिल को वापस लेने की मांग की और समुदाय से अपील की कि वे इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करें। शाही इमाम के अनुसार, वक्फ संपत्तियां इस्लामिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं, जो मस्जिदों, कब्रिस्तानों, और समाज कल्याण के लिए समर्पित हैं। इस बिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने और संपत्तियों के सर्वेक्षण के लिए कलेक्टर को अधिकार देने जैसे प्रावधानों पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया।
ईद-उल-फितर के मौके पर टीले वाली मस्जिद, लखनऊ में नमाज का समय सुबह 9:00 बजे निर्धारित किया गया है, इंशाअल्लाह। यह पवित्र दिन रमजान के महीने के अंत का प्रतीक है, जब मुस्लिम समुदाय एक साथ नमाज अदा करता है और खुशियां मनाता है। शाही इमाम ने समुदाय से अपील की कि वे नमाज के बाद इस बिल के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी राय व्यक्त करें और सरकार से इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करें।
उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और संरक्षण मुस्लिम समुदाय का धार्मिक अधिकार है, और इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा। शाही इमाम ने जोर देकर कहा कि यह समय एकता और जागरूकता का है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस्लामिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।
टीले वाली मस्जिद में हर साल की तरह इस बार भी ईद-उल-फितर की नमाज के लिए खास इंतजाम किए जाएंगे। नमाज के बाद लोग एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देंगे और समाज में भाईचारे का संदेश फैलाएंगे। शाही इमाम की यह अपील न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी चर्चा का विषय बन रही है।




