Home / धर्म चर्चा / जवाब- हर बालिग और समझदार व्यक्ति के ऊपर यह जरूरी है कि वह नीयत करे कि मैं फलां मुजतहिद का तकलीद करता/करती हूँ।

जवाब- हर बालिग और समझदार व्यक्ति के ऊपर यह जरूरी है कि वह नीयत करे कि मैं फलां मुजतहिद का तकलीद करता/करती हूँ।

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10 रमजान 11 मार्च 2025

कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैयद सादिक हुसैनी शिराज़ी   से जारी हेल्प लाइन पर नीचे दिए गये प्रष्नो के उत्तर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी ने दिए-
नोट- महिलाओं के लिए हेल्प लाइन षुरू की गयी है जिस मे महिलाओं केप्रष्नों के उत्तर खातून आलेमा देेगीं इस लिए महिलाओं इस न0 पर संपर्क करें। न0 6386897124
षिया हेल्प लाइन में तमाम मराजए के मुकल्लदीन के दीनी मसायल जानने के लिए स्ुाबह 10 -12  बजे तक 9415580936- 9839097407 इस नम्बर पर संपर्क करें। एवं ईमेलः उंेंमस786/हउंपसण्बवउ पर संपर्क करें।

सवाल- अगर कोई गैर-मुस्लिम, जो इफ्तार के महत्व को जानता है, किसी मस्जिद में इफ्तार कराने के लिए कुछ पैसे देता है, तो क्या हुक्म है?
जवाब- अगर कोई गैर-मुस्लिम व्यक्ति मस्जिद में इफ्तार के लिए कुछ पैसे देता है, तो उसे खुशी से स्वीकार करना चाहिए।
सवाल- अगर कोई रोजेदार किसी मृत व्यक्ति को नहलाता है, तो क्या श्गुस्ल-ए-मस्से-मैय्यतश् अनिवार्य होने से रोजा टूट जाएगा?
जवाब-मृत व्यक्ति को नहलाने से रोजा नहीं टूटेगा।
सवाल- अगर कोई महिला हैज़ या नेफास के गुस्ल को भूल जाती है और उसे कई दिनों बाद याद आता है, तो बीच में जो रोजे रखे हैं, उनका क्या हुक्म है?
जवाब-उसके रोजे सही होंगे। और अएनदा के लिए गुस्ल करेगी।
सवाल- अगर कोई रोजेदार जिस पर कफ्फारा वाजिब है, और वह तीनों कफ्फारो (प्रायश्चितों) को अदा करने में असमर्थ है, तो क्या हुक्म है?
जवाब- अगर 60 रोजे रखने की शक्ति न हो और न ही 60 गरीबों को खाना खिलाने की हैसियत हो, न ही एक गुलाम आजाद करने की हैसियत हो, तो इस्तिगफार करें और अपनी हैसियत के अनुसार कुछ दान करें। अलबत्ता, बाद में जब हैसियत पैदा हो जाए, तो एहतियात के तौर पर कफ्फारो को अदा किया जाए।
सवाल- तकलीद के लिए नीयत करना जरूरी है?
जवाब- हर बालिग और समझदार व्यक्ति के ऊपर यह जरूरी है कि वह नीयत करे कि मैं फलां मुजतहिद का तकलीद करता/करती हूँ।

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