सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी का देहांत 22 सितंबर 1539 को नहीं हुआ था, बल्कि उनका देहांत 22 सितंबर को नहीं मनाया जाता है। उनका देहांत वास्तव में 22 असू (कटीक) संवत 1596, जो कि ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 22 सितंबर 1539 के आसपास का समय है, पर हुआ था लेकिन सिख समुदाय में इसे 22 असू के दिन ही मनाया जाता है जो कि अक्टूबर या नवंबर माह में पड़ता है।
गुरु नानक देव जी के देहांत के अवसर पर सिख समुदाद निम्नलिखित कार्यक्रम आयोजित करता है:
1. अकंड पाठ: गुरु ग्रंथ साहिब का अकंड पाठ किया जाता है।
2. नाम सिमरन: गुरु नानक देव जी के जीवन और उपदेशों पर आधारित नाम सिमरन किया जाता है।
3. लंगर: गुरुद्वारों में लंगर का आयोजन किया जाता है।
4. कीर्तन: गुरु नानक देव जी के जीवन और उपदेशों पर आधारित कीर्तन किया जाता है।
5. धर्म प्रचार: गुरु नानक देव जी के उपदेशों और जीवन के बारे में धर्म प्रचार किया जाता है।
6. सेवा कार्यक्रम: सिख समुदाय द्वारा विभिन्न सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
7. प्रकाश पर्व: गुरु नानक देव जी के जन्मदिन के अवसर पर प्रकाश पर्व मनाया जाता है, जो कि नवंबर माह में पड़ता है।




