लखनऊ 19 अगस्त 2024 मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने हजरत सैयद अल शुहादा (अ.स.) के जुलूस की तैयारी को लेकर इमामबाड़े नजिम साहब विक्टोरिया स्ट्रीट लखनऊ में अंजुमन हाए मातामी की एक बैठक बुलाई जिसमें बड़ी संख्या में लखनऊ की मशहूर व मारूफ अंजुमन हाए मातामी शामिल हुई।
बैठक की शुरुआत पवित्र कुरान की तिलावत से हुई, जिसके बाद मौलाना सैफ अब्बास ने समभोदित किया और कहा कि लखनऊ का अजादारी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, ऐसा कहा जाता है कि लखनऊ अजादारी का केंद्र है क्योंकि यहां के वरिष्ठ विद्वान और धर्म गरूआंें ने बेहतरीन अजादारी मनाने की तमीज सिखाई है। लेकिन दुख की बात है कि कुछ वर्षों से डप्6 और अन्य इस्लाम विरोधी संगठनों के एजेंट अजादारी के जुलूस को बाधित करने की असफल कोशिश कर रहे हैं और सम्मानित जुलूस को एक रैली में बदलने की असफल कोशिश कर रहे हैं।
मौलाना सैफ अब्बास ने बड़ी संख्या में उपस्थित अंजुमन है मातमी के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अंजुमन हाए मातमी लखनऊ की अजादारी के संरक्षक हैं उन्हें आगे आना चाहिए और अजादारी के खिलाफ साजिश रचने वालों को रोकना चाहिए और उन्हें बेनकाब करना चाहिए। मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि जो लोग मराजे केराम की तस्वीरों की आड़ में जुलूस को रैली का रूप देते हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि नजफ-उल-अशरफ और कु़म अल-मकदस के मराजे केराम ने खुद जुलूस में अपनी तस्वीरें ले जाने से मना किया है और कहा है कि आका हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के जुलूस में गुलामों की तस्वीरें नहीं होनी चाहिए।
मौलाना सैफ अब्बास ने अंजुमन हय मातामी के पदाधिकारियों से कहा कि सैकड़ों साल पूर्व आपके वरिष्ठ धर्म गुरूओं ने आपको जो अजादारी दिया है, उस मे आप कोई कमी आने न दें और न ही किसी नई चीज को शरीक होने दें। इसके बाद अंजुमन हाय मातामी के पदाधिकारियों ने भाषण दिया, जिसमें एदाराए तहफुज़्ज़े अज़ा ने सर्वसम्मति से जिला प्रशासन से मांग की कि चूंकि जुलूस में सैकडों अंजुमने भाग लेती हैं, इसलिए जुलूस का समय बढ़ाया जाना चाहिए और रात होने के कारण रोशनी आदि का उचित प्रबंधन किया जाना चाहिए एदाराए तहफुज़्ज़े अज़ा ने इस बात पर सहमती कि संस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। बैठक में भाग लेने वाले संगठनों में हुसैनी फंड और विलायत फाउंडेशन के अलावा अंजुमन तसवीर उल अज्जा, अंजुमन जला-उल-ईमान, अंजुमने कदीम अले-अबा, अंजुमन, नदाये उज्जा, अंजुमन आफताब हुसैनी, अंजुमन नासिर अल-अ्ज़ा, अंजुमन मुहाफ़ी अल-ईमान, अंजुमन शाह इंनस व जान, अंजुमन रोशन दीन इस्लाम, अंजुमन रौनक दीन इस्लाम, अंजुमन काज़मिया आबदिया, अंजुमन अब्बासिया, अंजुमन गुनचा क़मर बनी हशिम, अंजुमन दरबारे हुसैनी, अंजुमन फ़तेह फुरात, अंजुमन क़मर बानी हाशिम, अंजुमन मोहिब्बान हुसैन, अंजुमन दत्ते हुसैनी, अंजुमन मकसदे हुसैनी, अंजुमन अतफाले अब्बासिया, अंजुमन गुनचा अब्बासिया, अंजुमन ग़रीब अल-अज़ा, अंजुमन गुलामान हुसैन, अंजुमन नूरे ईमान, अंजुमन गुलज़ार पंजचतन, अंजुमन शहीद फ़रात, अंजुमन, अंजुमन वफ़ा अब्बास, अंजुमन गुनचा मेहदियाए अंजुमन रज़ा, अंजुमन ज़ुल्फ़िेकार हुसैनी, अंजुमन मिराज-उल-इस्लाम, अंजुमन फ़रोगे-उल-इस्लाम, अंजुमन, लश्कर इमाम महदी, अंजुमन लश्कर हुसैनी, अंजुमन नूर हुसैनी समेत बड़ी संख्या में अंजुमन के जिम्मेदारान और मोमेनीन मौजूद रहे।
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