लाउडस्पीकर पर मौलाना इतनी चीख चीख के मजलिस ना पड़े🙏
सूरा लुकमान 31. आयत 19
और अपनी चाल में दरमियानी चाल अपनाओ और अपनी आवाज नीचे रखो इसलिए सबसे बुरी आवाज गधे की है
पहले के हमारे मौलाना मिम्बर रसूल से इस शाइस्ता अंदाज़ में मजलिस मे ऐसी दलीलों पेश कर ख़िताब करते थे कि बड़े बूढ़े क्या मजलिस बच्चों की समझ में आ जाती था, आज भी मौलाना महरूम नक़्क़न साहब, मौलाना मरहूम गुलाम असकरी साहब,मौलाना कल्बे सादिक, मौलाना कलबे आबिद वा मौलाना ज़ीशान हैदर जववादी साहब ,की मजलिसों की वीडियो देखी जा सकती, अल्लाह उनको जन्नत नसीब करें,और
हमारे आज के मौलाना सूरा अल इमरान आयत नंबर 110 अपनी नमाज़ को ना बहुत चीख़ के पढ़ो और न एकदम चुपके से बल्कि औसत तरीके से पढ़ो,
सुरा अराफ आयत नंबर 204 और अपने परवरदिगार को गिडगिड़ा के और डर के बहुत चीख़ के नहीं धीमी आवाज से सुबह-शाम उसको याद किया करो और बिल्कुल ग़ाफिल ना हो जाना,
ऐसी आयतों का तर्जुमा और तफसीर मिम्बर रसूल से इतना चीख चीख कर लाउडस्पीकर पर समझाते हैं, जैसे कोई नया आदमी समझे लड़ाई हो रही है और मसायब में रिक़त पैदा करने के लिए इतना चीख़ते हैं कि लोगों के आंखों में आंसू आने की जगह कानों से खून आजाये,कान में सीटी बजने लगती है, जैसे लगता है कि मौलाना को इतना जलाल आ गया है कि उनके हाथ में अगर तलवार होती तो ये सब के सर क़लम कर देते हैं,जैसे मौलाना भूल जाते हैं रात का वक्त है सब सोने की कोशिश कर रहे होंगे, बच्चों के एग्जाम होने वाले हैं बच्चे पढ़ रहे होंगे, कुछ बीमार होंगे जिनको परेशानी हो रही होगी, इनका कोई रोकने वाला नहीं है और वह लोग जो आगे बैठे वाह-वाह कर रहे होते हैं जब मजलिस खत्म होती है मौलाना मिम्बर से फर्श पर आते हैं तो कुछ लोग समझाने के बजाय कहते हैं मौलाना साहब माशाल्लाह बहुत अच्छी मजलिस पड़ी, जबकि ऐसे लोगों के खुद मजलिस समझ में नहीं आयी होती है लेकिन ऐसे लोगों के जैसे लगता है चापलूसी का इंजेक्शन लगा है , यह जो मौलाना मेंबर पर आए थे पढ़ कर आए हैं उसमें साफ-साफ बयां हो रहा है कि तुम चीखो नहीं तो इन मौलानाओ वा ज़ाकीरो के साथ तुम भी गुनाहगार हो रहे हो अल्लाह सबको हिदायत दे।
आशिक़े अहलेबैत
शाबू ज़ैदी
7617032786





