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मोहर्रम पर इस कदर रोया सुनकर दस्ताने कर्बला” मैं तो हिंदू ही रहा आंखें हुसैनी हो गई

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हिंदुस्तान की सर जमीन को सलाम पार्ट 3
हसन व हुसैन सय्यदा शबाबेया जन्ना,
प्रॉफिट मोहम्मद द्वारा बताए गए ये ख़ुदबा जुम्मे के दिन हर मुस्लिम फ़िरक़े की मस्जिद में पढ़ा जाता है,
लेकिन बादे रसूल इन्हीं लोगों को उन मुशरिक़ मुसलमान ने इमामे हसन को ज़हैर देखकर व इमामे हुसैन को कर्बला के मैदान में तीन दिन का भूखा -प्यासा शहीद कर दिया,
आज भी सऊदी अरब में इन लोगों पर हुए अत्याचार और हत्या पर चर्चा करना रोना गैर कानूनी है,
और इधर हमारे हिंदुस्तान में हमारे सनातन भाई जो न्याय और धर्म- अधर्म का फर्क बहुत अच्छी तरह समझते हैं,
इमामे हुसैन की शहादत पर चिंता करते हुए
अपने घर में ताजिए के तौर पर मेहमान बुलाते हैं,और कर्बला के शहीदों पर अपनी आंखें नम करते हैं,
और ऐसा अत्याचार जुल्म दोबारा ना हो उसके लिए खड़े रहते हैं,
एक हिंदू शायर ने इस संबंध में बहुत अच्छा शेर कहा है

“मोहर्रम पर इस कदर रोया सुनकर दस्ताने कर्बला”
” मैं तो हिंदू ही रहा आंखें हुसैनी हो गई”
हिंदुस्तान और हमारे सनातनी भाइयों को इस जज्बे के लिए तमाम हुसैन से प्यार करने वालों का सलाम ????
शाबू ज़ैदी
7617032786

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