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सऊदी अरब में इमामे हुसैन का गम की मजलिस एवं ताज़िया नहीं रख सकते

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मैंने अपने बुजुर्गों से सुना है कि प्रोफेट मुहम्मद ने हिंदुस्तान के तरफ मुंह करके कहा था,
इधर से ईमान(धर्म पर विश्वास) की खुशबू आ रही है,
प्रोफेट मोहम्मद के नाती इमामे हुसैन ने यज़ीदी फौज से कहा था,मुझे हिंद जाने दो,
जिस देश में प्रोफेट मोहम्मद पैदा हुए,
दीने इस्लाम लोगों तक
पहुंचाया
लेकिन उस देश वह आसपास के देशों मे ईमान की खुशबू महसूस नहीं हुई, कर्बला व उसकी मिट्टी इस वजह से अहमियत रखती है कि उस मिट्टी में इमामे हुसैन का खून मिला है,
लेकिन ईमान की खुशबू न होना हुसैन के क़त्ल से साबित है,
हमारे देश की मिट्टी और वहां की मिट्टी मे फ़र्क़ है,
वहां की मट्टी को हाथ मे प्यार से लो और छोड़ दो सब हाथ से झड़ जाती है,

हमारे देश की मिट्टी को प्यार से हाथ में लो और छोड़ दो,
कुछ माटी हाथ में चिपक जाती है,और
बगैर हाथ धोए नहीं छुट्टती है, ऐसे ही इस मिट्टी में जन्मे हुए लोग किसी की तकलीफ को समझ ले तो उसकी तकलीफ को दूर करने एवं दोस्ती निभाना अपना धर्म समझते हैं,
हमारे देश की मिट्टी में जन्मे लोगों में इनाम की खुशबू तभी तो महसूस हुई, इसी खुशबू को महसूस करते हुए प्रोफेट मोहम्मद के नाती ने हिंदुस्तान जाने को कहा लेकिन वहां की मिट्टी से जन्मे लोगों ने जाने नहीं दिया और इमामे हुसैन उनके साथी और परिवार के लोगों को 3 दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया और उनके घर वालों को बंदी बनाकर रक्ख आज भी
सऊदी अरब में इमामे हुसैन की कुर्बानी/ बलिदान का कोई महत्व नहीं मानते,न उनकी शहादत का जिक्र करने देते हैं और उन पर रोने और मातम करने वालों को कानूनी सजा देते हैं,
लेकिन हमारे देश में हम स्वतंत्र हैं हुसैन का गम बनाने के लिए और साथ में हमारे द्वारा चुनी हुई सरकार व सनातन भाई हर तरीके से अपना सहयोग पानी की सबील व खाद्य सामग्री बाट, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था करते हैं, इस महान बलिदान के लिए वह अपना कर्तव्य समझते हैं,
तो कुछ परसेंट हमारे सनातनी भाई अपने जन्म लेने वाले धर्म पर रहते हुए, इमाम हुसैन का ग़म मानते हैं, ताजिया रखते हैं मातम करते हैं, यही हमारे देश की विशेषता है, आज भी पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा इमामे हुसैन से मोहब्बत करने वाले और उनके बलिदान का जिक्र करने वाले हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा रहते हैं,इसी वजह से इस धरती पर पैदा होना खाना पीना चलना और इसी मिट्टी में मर के मिल जाना पर हम अपना गर्व समझते हैं यहां के हमारे सनातनी भाइयों ने जैसे राजा झाऊ लाल, राजा दिलगीर, राजा टिकट, पड़ान जैसे आने को महान लोगों ने इमामबाड़ा मस्जिद आदि बनवाई और हमारे सनातनी भाइयों ने इमाम हुसैन की मोहब्बत एवं उनके बलिदान पर नौहे मातम क़सीदे लिखे हैं ईश्वर ऐसे लोगों की आत्मा को शांति दे

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