Warning: Undefined array key "LyqUaF" in /home/podcloud/therevolutionnews.com/wp-content/plugins/url-shortify/libs/fs/includes/class-fs-garbage-collector.php on line 1
सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1929 को बलराज दत्त के रूप में हुआ। - The Revolution News
Home / चर्चित चेहरे / सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1929 को बलराज दत्त के रूप में हुआ।

सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1929 को बलराज दत्त के रूप में हुआ।

Spread the love

सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1929 को बलराज दत्त के रूप में हुआ। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1955 में ‘रेलवे प्लेटफार्म’ से की और अगले कुछ दशकों में फिल्म जगत पर छा गए। उनकी पहली बड़ी सफलता 1956 की ‘एक ही रास्ता’ से मिली। इसके तुरंत बाद, 1957 में आई ‘मदर इंडिया’ ने उन्हें भारतीय सिनेमा का सितारा बना दिया। इसी फिल्म के दौरान उनकी मुलाकात अभिनेत्री नरगिस से हुई और दोनों ने 1958 में शादी कर ली। उनका एक बेटा संजय दत्त, और दो बेटियां नम्रता और प्रिया दत्त हैं।

सुनील दत्त ने अपने करियर में कई सफल और यादगार फिल्में दीं। उनकी अन्य चर्चित फिल्में ‘साधना’ (1958), ‘सजाता’ (1959), ‘गुमराह’ (1963), ‘मुझे जीने दो’ (1963), और ‘वक्त’ (1965) रहीं। ‘मुझे जीने दो’ में एक डाकू के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिलाया। 1964 में उन्होंने ‘यादें’ नामक फिल्म बनाई जिसमें वह इकलौते अभिनेता थे। इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी शामिल किया गया।

उनकी हिट फिल्मों की फेहरिस्त में ‘मेरा साया’ (1966), ‘मिलन’ (1967), ‘हमराज़’ (1967), और ‘पड़ोसन’ (1968) जैसी फिल्में शामिल हैं। ‘पड़ोसन’ ने खासकर एक संगीतमय हास्य फिल्म के रूप में भारतीय दर्शकों के बीच अलग जगह बनाई। इसके गीत ‘झुमका गिरा रे’ और ‘मेरा साया साथ होगा’ आज भी सुनने वालों को लुभाते हैं।

70 के दशक में सुनील दत्त ने अपने करियर में उतार-चढ़ाव देखे। ‘हीरा’ (1973) ने उन्हें फिर से स्थापित किया और ‘गीता मेरा नाम’, ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’, और ’36 घंटे’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिट परेड में बनाए रखा। 1976 में ‘नागिन’ में उनकी भूमिका को सराहा गया। इसके बाद, 1979 की ‘जानी दुश्मन’ ने एक बार फिर साबित किया कि वह बॉक्स ऑफिस पर अपनी चमक बरकरार रख सकते हैं।

1980 के दशक में, ‘शान’ (1980) में उनकी उपस्थिति ने उन्हें एक समर्थ कलाकार के रूप में प्रस्तुत किया। 1981 में, उन्होंने अपने बेटे संजय दत्त की पहली फिल्म ‘रॉकी’ लॉन्च की। उन्होंने 1987 में ‘वतन के रखवाले’ जैसी हिट फिल्म दी और फिर राजनीति में चले गए।

राजनीति में कदम रखने के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए फिल्मों से ब्रेक लिया। हालांकि, 2003 में ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ में संजय दत्त के साथ काम करके उन्होंने साबित कर दिया कि अभिनय की उनकी कला बेमिसाल है। ये उनकी अंतिम फिल्म थी। 25 मई 2005 को उनका देहांत हो गया।

सुनील दत्त ने अपने जीवन में न केवल अभिनय के क्षेत्र में बल्कि समाज सेवा और राजनीति में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें 1968 में पद्मश्री से नवाजा गया और 1995 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला। उनकी विरासत आज भी उनके द्वारा बनाए गए सशक्त और अविस्मरणीय किरदारों के रूप में कायम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *