मैंने कल सोशल मीडिया पर अयातुल्लाह सिस्तानी साहब का एक वाक़ीया पढ़ा,
आयतुल्ल्हा सिस्तानी साहब के सामने डॉलर रखते हुए कहा जी मेरा जाती पैसा है. खुम्स नहीं आप अपना घर बनवा ले
आपने जवाब में उससे कहा कल मैं अपने मौला अली को क्या जवाब दूंगा अगर मौला ने मुझसे पूछ लिया की तेरी मर्जयत फलां मोमिन का घर नहीं था
तो तूने अपना घर कैसे बनवा लिया
यह देखा गया है कि.मरजा जिनके पास क़ौम करोड़ों रुपए खुम्स देती है
वो एक बहुत साधारण सी जिंदगी अपने पुराने टूटे हुए मकान में बिताते हैं,
हमारे एक दोस्त छोटे भाई जोकि पढ़ कर और सोच समझ कर इस्लाम में दाख़िल हुए,
उन्होंने अपना नाम अब्बास मुखर्जी रखा है
उन्होंने पूछा शाबू भाई हिंदुस्तान में अभी कोई मरजा क्यों नहीं हुआ,
जबकि हिंदुस्तान से ईरान इराक सब पढ़ने जाते हैं,
मुझको हिंदुस्तानी मरजा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी,
अगर किसी के पास जानकारी हो तो जरूर बताएं
देखा यह गया है कि दूसरे देश में बैठा हुए ,
एक मरजा किसी देशों में जैसे हिंदुस्तान में
एक रिकवरी एजेंट
या इजाज़ा देता है
खुम्स जमा करने का अथॉरिटी देता है,
सवाल ये है इनको यह इजाज़ा किन शर्तों पर दिया जाता है,
क्या कुछ सिक्योरिटी मनी इनसे जमा कराई जाती हैं,
उदाहरण के तौर पर जब बैंक अपना रिकवरी एजेंट नामित करती है,
चरित्र प्रमाण पत्र के साथ हैसियत प्रमाण पत्र भी जमा करना पड़ता है
ताकि रिकवरी एजेंट कोई धांधली ना कर पाए,
मैं किसी पर इल्जाम नहीं लगा रहा हूं
मैं ओलीमाओ की बहुत इज़्ज़त करता हूं
अब गौर करने की बात यह है कि मरजा तो बहुत साधारण जिंदगी बीताते है और उनका रिकवरी एजेंट एक आलीशान जिंदगी जीता है जबकि इजाज़ा के अलावा उनका कोई व्यापार नहीं दिखाई देता,
तब भी उनके बच्चे क्रिश्चियन मिशनरीज में पढ़ते हैं और एब्रॉड पढ़ने एवं नौकरी करने जाते हैं,
जैसे वाक़िफ़ की मंशा को नहीं बदला जा सकता,
वैसे ही खुम्स देने वालों के मंशा नहीं बदला जा सकती क़ौम को शक है कुछ गड़बड़ है
क्यों नहीं यह सारा पैसा लेते वक्त पक्की रसीद और उसका खर्च ऑनलाइन किया जाए,
साथ ही साथ हर साल इसका ऑडिट भी कराया जाए
ताकि हकदारों को हक पहुंच सके?



