आज पहला बड़ा मंगल है,
मेरा जाना मेरे मित्र डॉ अनूप के साथ लखनऊ यूनिवर्सिटी के सामने महाबली हनुमान जी के मंदिर हुआ, जहां मैंने देखा सैकड़ो की तादाद में तपती धूप में दर्शन के लिए लोग लाइन लगाए खड़े थे,
और अपना नंबर आने की प्रतीक्षा कर रहे थे,
साथ ही साथ मैंने देखा कि ज्यादातर दर्शनार्थ आज के दिन ग़रीबों में बांटने के लिए कुछ ना कुछ खाद्य सामग्री-पीने की चीज लेकर आ रहे थे,
और बगैर किसी के धर्म जाति देखकर उनमें वितरण कर रहे है,
मैंने सोचा कि यह लखनऊ है,
यहां हिंदुओं ने मस्जिद इमामबाड़े बनवाए हैं,
मुसलमान ने अलीगंज का हनुमान मंदिर ऐसे अनेकों मंदिर बनवाए,
हमारे लखनऊ एकता भाईचारा के लिए प्रतीक हैं, यहां के मूल निवासियों जो तहजीब है वो पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती,
और खास बात यह है कि बड़े मंगल में आयोजन करने की शुरुआ,
हमारे लखनऊ से हुई,
आज के दिन की आस्था है कि वह दिन ज्येष्ठ माह का मंगलवार का था जब रामभक्त हनुमान ने बूढ़े वान का रूप धारण किया था।
इसके बाद से ही ज्येष्ठ मास के हर मंगलवार को बुढ़वा मंगल कहा जाने लगा। दूसरी मान्यता के मुताबिक, ज्येष्ठ माह के मंगलवार के दिन ही प्रभु श्री राम से बजरंगबली का मिलन हुआ था। इसलिए इस दिन को बड़ा मंगल कहा जाता है।
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बड़े मंगल को तपती धूप की परवाह न करते हुए दर्शनार्थी पहुंचे महाबली के मंदिर




