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प्रश्न- शिया हजरात में तरावीह क्यों नहीं होती?

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षिया हेल्पलाइन 17 रमज़ार 28 मार्च 2024

कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैय्यद सादिक़ हुसैनी शीराज़ी से जारी हेल्प लाइन पर नीचे दिए गये प्रश्नो के उत्तर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी एवं उलेमा के पैनल ने दिए-
लोगों की सुविधा के लिए ‘‘शिया हेल्पलाइन’’ कई वर्षों से धर्म की सेवा कर रही है, इसलिए जिन मुमेनीन को उनके रोज़ा, नमाज़ या किसी अन्य धार्मिक समस्या के बारे में संदेह है, तो वह तमाम मराजए के मुकल्लेदीन के मसाएले शरिया को जानने के लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे आप इन नंबरों 9415580936, 9839097407 पर तक संपर्क कर सकते हैं। एवं ईमेलः उंेंम स786/हउंपसण्बवउ पर संपर्क करें।
नोट- महिलाओं के लिए हेल्प लाइन शुरू की गयी है जिस मे महिलाओं के प्रश्नों के उत्तर खातून आलेमा देेगीं इस लिए महिलाओं इस न0 पर संपर्क करें। न0 6386897124

सवाल-अगर कोई शख्स मस्जिद में अक़ीक़ा का गोश्त पकाकर अफतार कराए तो सही है
उत्तर-अक़ीक़ा के गोश्त से अफतार करया जा सकता है, लेकिन बेहतर यह है कि यह गरीब लोगो को दिया जाए ।
सवाल-क्या कोई शख्स अपना एक फितरा दो लोगों में बांटकर दे सकता है?
जवाब-एहतियाते वाजिब यह है कि किसी जरूरतमंद को एक फितरा से कम न दिया जाए, बल्कि अगर ज्यादा दिया जाए तो कोई हर्ज नहीं।
प्रश्न-क्या कोई व्यक्ति ज़कात के पैसे से कुरान और दुआ की पुस्तकें खरीद कर वक्फ कर सकता है
उत्तर-ज़कात के पैसे से कुरान और दुआ की पुस्तकें वक्फ किया जा सकता हैं।
सवाल-अगर ज़कात के पैसे से ज़मीन ख़रीदी जाए और वक़्फ की जाए तो क्या हुक्म है?
उत्तर- ज़कात के पैसे से ज़मीन खरीद कर उसे आम लोगों को वक्फ कर सकता है, जिनका खर्च उस पर अनिवार्य है (अर्थात बच्चों, आदि), उनके लिए वक्फ नहीं कर सकता।
प्रश्न- शिया हजरात में तरावीह क्यों नहीं होती?
उत्तर-तरावीह का उल्लेख कुरान में कहीं नही है और न ही हजरत मोहम्मद स0अ0 की हदीसों में है पैगंबर की मृत्यु के बाद इसलाम मे तरावीह डाली गई है।

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