वाजिद अली शाह अवध के नवाब रहे ये तो आप सब जानते है . लेकिन आप शायद यह नहीं जानते कि वाजिद अली शाह को ‘ठुमरी’ के संगीत विधा के जन्मदाता के रूप में भी जाना जाता है. कहा जाता है कि जब अंग्रेजों ने अवध पर कब्जा कर लिया और नवाब वाजिद अली शाह को देश निकाला दे दिया, तब उन्होने ‘बाबुल मोरा नैहर छूटो जाय्’ यह प्रसिद्ध ठुमरी गाते हुए अपनी रयत से अलविदा कहा।
हमने वाजिदअली शाह को तो नहीं देखा मगर महान फिल्मकार सत्यजीत रे की फिल्म ‘ शतरंज के खिलाड़ी ‘ में अमजद खान द्वारा निभाए गये वाजिदअली शाह के किरदार को मैं भूल नहीं पाता हूँ. बेहतरीन अभिनय.





