18 महीने से शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो गई लेकिन बच्चों को शिक्षित करने के लिए सरकार की फिक्र और सोच टैब और मोबाइल पर जाकर खत्म हुई। एक तरफ जहां पूरे प्रदेश में रात्रि कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया और कांग्रेस पार्टी द्वारा मैराथन को स्थगित करवा दिया गया वहीं दूसरी तरफ लखनऊ के इकाना स्टेडियम में भरी भीड़ में छात्र एवं छात्राओं को टैब और मोबाइल बांटे गए। सवाल यह है क्या टैब और मोबाइल से किसी भी छात्र या छात्रा का शैक्षिक स्तर ऊंचा होगा?
टैब और मोबाइल लेकर निकले छात्रों से बातचीत के बाद यह अंदाजा हुआ कि उनकी नजर में यह एक चुनावी झुनझुना है। सरकार ने तो छात्र एवं छात्राओं को लुभाने की भरपूर कोशिश की लेकिन क्या यह कोशिश उनकी कामयाब होगी यह भविष्य के लिए एक सवाल है । हालांकि छात्रों ने यह भी साफ कहा कि हमारा वोट किसको जाएगा यह चुनाव में पता चलेगा। उन्होंने कहा कि टैब और मोबाइल लेने का मतलब यह नहीं है कि हम उन्हीं को वोट दें। क्या टैब और मोबाइल पा जाने से छात्र-छात्राओं के घर की समस्या हल हो जाएगी?
क्या उनको नौकरी मिल जाएगी ?छात्रों ने कहा कि सरकार अगर हमें नौकरी दे तो हम खुद मोबाइल खरीद सकते हैं।
सरकार को छात्रों से या शिक्षा से इतना ही प्रेम है तो पिछले 6 महीने से लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों की मांगे क्यों नहीं सुनी जा रही है? बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक क्यों हो रहे हैं? फार्मासिस्ट लगातार धरना प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? यह सब ऐसे सवाल है जो जनता की नजरों के सामने उलझी पहेली की तरह हैं।
लेकिन कहीं ऐसा ना हो कि जनता के सामने उलझी पहेली पेश करने वाली सरकार खुद इस में उलझ कर रह जाए। इंतजार कीजिए और देखिए आगे आगे क्या होता है।
सैय्यद एम अली तक़वी
चीफ़ एडिटर
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