भारत में आर्यों नें जब भारत के मुलनिवाशियों की हत्याएं की और उनके गावों को जलाकर राख कर दिया तो यहां की एक जाति जिसके भिन्न भिन्न भाषाओं में भिन्न भिन्न नाम हैं,जिसका अंतिम अक्षर विन्यास ‘अरि’ को प्रतिध्वनित करता है जैसे चमार,महार,नेवार तथा पेरियार इत्यादि, महाराष्ट्र में जब छत्रपति शिवाजी का उदय हुआ तो उनका साथ महारों नें ही दिया था,यदि महारों नें शिवाजी का साथ नहीं दिया होता तो शिवाजी कभी भी औरंगजेब से टक्कर न ले पाते,शिवाजी को जब मुगल बादशाह नें गिरफ्तार करके आगरे के कारागार में डाल दिया तो उनको कारागार से बचाकर बाहर लाने वाला जो व्यक्ति था,उसका नाम जीवाजी महार था,उसके बाद जब किले पर किले शिवाजी फतह करते गए उनके साथ भी देने वाले महार लोग ही थे,राज्याभिषेक एक ऐसा घिनौना विशेषाधिकार था जिसके द्वारा आर्यों नें बिना युद्ध किये क्षत्रियों से उनका राज्य छीन लिया,युद्ध मे विजयी शिवाजी का जब राज्याभिषेक होनें की नौबत आई तो आर्य पुरोहितों नें शिवाजी को शूद्र घोषित करके उनका राज्याभिषेक करने से साफ इनकार कर दिया था,जब काशी के गागाभट्ट नामक आर्य पुरोहित को बेहिसाब घूस दी गयी तो उसने शिवाजी का राज्याभिषेक तो कर दिया पर प्रचार में कुछ और ही प्रचारित कर दिया,फलस्वरूप महाराष्ट्र में आर्य ब्राम्हणों के पैर कुछ इस तरह जमें कि मानवता भी चीत्कार उठी,एक बार जब एक संत नें पंढरपुर के दर्शन करने की हिम्मत दिखाई तो उसके पैरों में रस्सी बांधकर बैलों के जुएँ से बांधकर बैलों को चाबुक मार मार कर दौड़ाया गया,शिवाजी के शासनकाल में ही पेशवाई साम्राज्य कुछ इस तरह कायम हुआ जिसमें महारों की इतनी दुर्गति हुई कि इंशानो पर अमानवीय अत्याचार के सारे रिकार्ड टूट गए,यही वह काल था जब अछूतों को सारे अधिकारों से वंचित कर उन्हें कमर में झाड़ू और गले में हांडी बाँधनें पर मजबूर कर दिया गया था-
“दलित दस्तावेज-पृष्ठ-131”
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